भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज का आगाज नौ विकेट की शानदार जीत के साथ किया। इस जीत की नायिका रहीं प्रतिका रावल, जिन्होंने नाबाद शतक जड़कर टीम को आसानी से लक्ष्य तक पहुंचाया। प्लेयर ऑफ द मैच चुनी गईं प्रतिका ने अपनी पारी, बल्लेबाजी में आत्मविश्वास और चोटों से वापसी को लेकर अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि बल्लेबाज के तौर पर कभी भी संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता और जितनी ज्यादा बल्लेबाजी करने का मौका मिलता है, उतना ही आत्मविश्वास बढ़ता है।
प्रतिका रावल ने जड़ा नाबाद शतक
- वडोदरा में शुक्रवार को खेले गए पहले वनडे में भारत ने जिम्बाब्वे को नौ विकेट से हराया। पहले बल्लेबाजी करते हुए जिम्बाब्वे की टीम 197 रन पर ऑलआउट हो गई। भारत की ओर से बाएं हाथ की स्पिनर श्री चरणी ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 23 रन देकर चार विकेट झटके। यह उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। क्रांति गौड़ ने भी तीन विकेट लेकर जिम्बाब्वे की पारी समेटने में अहम भूमिका निभाई।
- 198 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने 27.1 ओवर में एक विकेट खोकर 200 रन बना लिए। प्रतिका रावल ने नाबाद 100 रन की पारी खेली, जबकि शेफाली वर्मा 64 रन बनाकर नाबाद लौटीं। कप्तान स्मृति मंधाना ने भी 32 रन का योगदान दिया।
- प्रतिका ने अपनी पारी में 15 चौके लगाए और 100 से अधिक के स्ट्राइक रेट से रन बनाए। उन्होंने मैदान पर आकर्षक शॉट खेलने के साथ जोखिम लेने से भी परहेज किया। स्मृति और प्रतिका के बीच पहले विकेट के लिए 94 रन की साझेदारी हुई। स्मृति के आउट होने के बाद शेफाली ने मोर्चा संभाला और प्रतिका के साथ मिलकर भारत को आसान जीत दिलाई।
मंधाना-प्रतिका
- फोटो : BCCI Women
'जितना ज्यादा बल्लेबाजी करती हूं, उतना आत्मविश्वास बढ़ता है'
- प्लेयर ऑफ द मैच बनने के बाद प्रतिका ने कहा कि टीम की जीत में रन योगदान देकर उन्हें काफी खुशी हुई। उन्होंने कहा, 'आज का दिन काफी अच्छा रहा। जब आप रन बनाकर टीम की जीत में योगदान देते हैं, तो अच्छा लगता है। रन बनाना हमेशा अच्छा होता है और मुझे क्रीज पर रहकर जितना संभव हो, उतनी बल्लेबाजी करना पसंद है।'
- अपनी शतकीय पारी का विश्लेषण करते हुए प्रतिका ने माना कि बल्लेबाज के तौर पर उनके लिए सीखने की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है। उन्होंने कहा कि उनकी पारी में कुछ ऐसे शॉट भी थे, जिनसे वह पूरी तरह संतुष्ट नहीं थीं।
- प्रतिका के मुताबिक, 'एक बल्लेबाज के तौर पर आप कभी संतुष्ट नहीं हो सकते और यही इस खेल की खूबसूरती है। जब भी आप बल्लेबाजी करने उतरते हैं या कोई मैच खेलते हैं, तो कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। मुझे लगता है कि मैं जितनी ज्यादा बल्लेबाजी करती हूं, उतना ही मेरा आत्मविश्वास बढ़ता है।'
- उन्होंने आगे कहा कि यह उन दिनों में से एक था, जब गेंद ठीक उसी दिशा में जा रही थी, जहां वह उसे खेलना चाहती थीं। जब गेंद बल्ले के बीच में अच्छी तरह लगती है, तो आत्मविश्वास बढ़ता है और दिमाग में ज्यादा विचार नहीं आते। इससे बल्लेबाजी करना आसान हो जाता है। प्रतिका ने कहा कि उनके लिए यह दिन अच्छा रहा और पारी का अंत भी शानदार तरीके से हुआ।
पहली वनडे सेंचुरी की सालगिरह पर फिर जड़ा शतक
प्रतिका रावल के लिए यह शतक इसलिए भी खास रहा, क्योंकि उन्होंने अपना पहला वनडे शतक भी इसी तारीख को लगाया था। उन्होंने बताया कि बल्लेबाजी के लिए उतरने से पहले टीम के सदस्यों ने टीवी पर भारत और न्यूजीलैंड का मैच देखा था। इसी दौरान उन्हें याद आया कि इसी दिन उन्होंने अपना पहला वनडे शतक बनाया था।
प्रतिका ने कहा, 'हम बल्लेबाजी करने जाने वाले थे, तभी हमने टीवी पर भारत और न्यूजीलैंड का मैच देखा। उस दौरान बातचीत हुई कि आज ही के दिन मैंने अपना पहला वनडे शतक लगाया था। इसलिए मैं बहुत खुश हूं। इससे अच्छी यादें ताजा हो गईं और उसी तारीख को दोबारा शतक बना पाना वाकई शानदार है।' इस तरह प्रतिका ने अपने वनडे करियर का तीसरा शतक जड़ते हुए न सिर्फ भारत को जीत दिलाई, बल्कि अपने लिए भी इस दिन को यादगार बना दिया।
प्रतिका रावल
- फोटो : BCCI Women
चोटों से वापसी पर भी बोलीं प्रतिका
- प्रतिका ने चोटों से निपटने और वापसी के दौरान मानसिक मजबूती बनाए रखने को लेकर भी अपनी सोच साझा की। उन्होंने कहा कि वह मुश्किल परिस्थितियों में चीजों को सरल रखने की कोशिश करती हैं और सबसे पहले यह स्वीकार करती हैं कि कुछ चीजें उनके नियंत्रण में नहीं होतीं।
- उन्होंने कहा, 'मैं चीजों को सरल रखने की कोशिश करती हूं। सबसे पहले यह स्वीकार करना जरूरी है कि यह मेरे हाथ में नहीं है। चोट खेल का हिस्सा हैं। जो चीज आपके हाथ में नहीं है, उसके लिए आप बहुत कुछ नहीं कर सकते। ऐसे में उसकी चिंता क्यों करें और तनाव क्यों लें?'
- प्रतिका ने यह भी कहा कि उनके आसपास अच्छे लोग हैं, जो मुश्किल समय में उनका हौसला बढ़ाते रहते हैं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके मुताबिक, मैदान पर दोबारा लौटना और टीम के लिए योगदान देना हमेशा अच्छा लगता है।
श्री चरणी की घातक गेंदबाजी ने जिम्बाब्वे को रोका
- भारतीय टीम की जीत में प्रतिका की बल्लेबाजी के साथ श्री चरणी की गेंदबाजी भी निर्णायक रही। चरणी ने 4/23 के आंकड़े के साथ जिम्बाब्वे के शीर्ष और मध्यक्रम को झकझोर दिया। उन्होंने मोडेस्टर मुपाचिकवा, चिपो मुगेरी-तिरिपानो, न्याशा ग्वांजुरा और मिशेल मावुंगा को आउट किया। क्रांति गौड़ ने तीन विकेट लिए, जबकि दीप्ति शर्मा को दो सफलताएं मिलीं।
- जिम्बाब्वे की ओर से बेलेव्ड बिजा ने 92 गेंदों पर 62 रन बनाकर संघर्ष किया, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। हालांकि, भारतीय टीम की फील्डिंग एक बार फिर चिंता का विषय रही। विकेटकीपर ऋचा घोष और दीप्ति शर्मा ने कैच छोड़े, जबकि क्रांति गौड़ भी एक मुश्किल मौका नहीं लपक सकीं।
- इसके बावजूद भारतीय टीम ने गेंद और बल्ले दोनों से दमदार प्रदर्शन करते हुए सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। प्रतिका रावल का शतक और श्री चरणी का करियर का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन पहले वनडे में भारत की जीत के सबसे बड़े आकर्षण रहे।