दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टेस्ट में भारत की खराब बल्लेबाजी ने कई पूर्व खिलाड़ियों और विशेषज्ञों को निराश किया। महान स्पिनर अनिल कुंबले ने टीम के रवैये पर सख्त टिप्पणी की, जबकि दूसरी ओर भारतीय ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर का कहना है कि रणनीति सही थी, लेकिन उसे लागू करने में कमी रह गई। भारत तीसरे दिन दूसरी पारी में सिर्फ 201 रन पर सिमट गया और दक्षिण अफ्रीका के सामने 288 रन से पिछड़ गया। मेहमान टीम के छह फुट आठ इंच लंबे तेज गेंदबाज मार्को यानसेन ने 93 रन की शानदार पारी खेलने के बाद गेंदबाजी में 48 रन देकर छह विकेट झटके।
कुंबले ने लगाई लताड़
कुंबले ने कहा कि भारतीय बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट के मूल सिद्धांत, जज्बा और संयम का प्रदर्शन नहीं कर सके। उन्होंने जियो स्टार पर कहा, 'भारत की बल्लेबाजी काफी खराब रही। टेस्ट क्रिकेट के लिए जरूरी जज्बा और संयम नहीं था। कुछ अच्छी गेंदें जरूर थीं, लेकिन बल्लेबाज कठिन स्पैल के लिए तैयार ही नहीं दिखे।' उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय बल्लेबाज जैसे जल्दी लक्ष्य का पीछा करने की सोच में थे, जो इतने बड़े स्कोर के सामने अवास्तविक है। उन्होंने आगे कहा, 'इतने बड़े स्कोर को धीरे-धीरे हासिल किया जाता है, लेकिन भारत ने वैसा जज्बा नहीं दिखाया।'
रणनीति अच्छी, अमल कमजोर: वाशिंगटन सुंदर
भारतीय बल्लेबाजों की आलोचना के बीच वाशिंगटन सुंदर ने बल्लेबाजों का बचाव किया। उन्होंने माना कि ऋषभ पंत और ध्रुव जुरेल के शॉट चयन पर सवाल उठे हैं, लेकिन कई बार अच्छी योजना भी अमल के दौरान सफल नहीं हो पाती। पंत जब सात रन पर खेल रहे थे, तभी यानसेन की शॉर्ट गेंद पर विकेटकीपर को कैच देकर आउट हुए। इससे पहले जुरेल ने भी यानसेन के खिलाफ अनावश्यक पुल शॉट खेलकर विकेट गंवाया।
वाशिंगटन ने कहा, 'कभी-कभी ऐसे शॉट स्टैंड में भी जाते हैं और तारीफ मिलती है। आज नहीं गया, बस इतना फर्क है। योजना और कौशल का समर्थन करना होता है, लेकिन कभी-कभी इसे वैसा लागू नहीं किया जा सकता जैसा चाहते हैं।' उन्होंने कहा कि पिच बल्लेबाजी के लिए अच्छी थी और असमान उछाल जैसी कोई बात नहीं थी। उन्होंने आगे कहा, 'यह बहुत अच्छा और जीवंत विकेट था। अगर बल्लेबाज क्रीज पर टिकते तो रन बनते। यानसेन लंबा है, इसलिए उसे गुड-लेंथ से उछाल मिलता है, लेकिन असमान उछाल नहीं था।'