टेस्ट में जब दोनों टीमें भिड़ती हैं तो कड़ी टक्कर देखने को मिलती है। भारत और पाकिस्तान के कई खिलाड़ी इन दो टीमों के बीच मैच में अच्छा प्रदर्शन कर हीरो बन गए। वहीं, दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच सम्मान भी देखने को मिलता है। कई ऐसे मौके भी आए जब भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच मैदान पर बहस भी देखने को मिली। एक ऐसी ही घटना 1998/99 के दौरान देखने को मिली थी। इसका जिक्र वसीम अकरम ने अपनी जीवनी 'सुल्तान-ए मेमॉयर' में किया है।
एशियन टेस्ट चैंपियनशिप के दौरान कोलकाता के ईडन गार्डंस में खेले गए मैच में पहली पारी में तेंदुलकर शोएब अख्तर की यॉर्कर पर क्लीन बोल्ड हो गए थे। इस पारी में तेंदुलकर कोई रन नहीं बना सके थे। वहीं, दूसरी पारी में तेंदुलकर फील्डिंग कर रहे शोएब अख्तर से टकरा गए थे और गिर गए थे। वह रन आउट हुए थे। उस वक्त पाकिस्तान के लिए गेंदबाजी वसीम अकरम कर रहे थे।
तेंदुलकर के आउट होते ही स्टेडियम में शांति छा गई थी। स्टेडियम में मौजूद दर्शक पाकिस्तानी खिलाड़ियों के अपील करने और तेंदुलकर के आउट होने पर जश्न मनाने को लेकर खुश नहीं थे। तभी फैन्स मैदान पर पत्थर फेंकने लगे और पाकिस्तानी खिलाड़ियों के इस बर्ताव का विरोध करने लगे। वसीम अकरम ने खुलासा किया कि इसके बाद पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने वसीम अकरम से बात की थी।
अकरम ने किताब में लिखा- ब्रेक के दौरान सुनील गावस्कर के साथ मैच रेफरी ने मुझसे संपर्क किया। गावस्कर ने कहा- वसीम, हमें लगता है कि आपको सचिन को वापस बुलाना चाहिए। भारत में लोग आपको प्यार करेंगे। गावस्कर को पता था कि कोलकाता की भीड़ कितनी पक्षपाती हो सकती है। उन्होंने एक बार वहां टेस्ट खेलने से इनकार कर दिया था क्योंकि उनके साथ कोई बुरी घटना घटी थी।
गावस्कर की बात पर वसीम अकरम ने कहा था- सन्नी भाई, लेकिन मेरे पास चिंता करने के लिए मेरे अपने प्रशंसक हैं। भारतीय फैन्स भले मुझे भारत में प्यार करें, लेकिन पाकिस्तान में लोग मुझसे नफरत करेंगे। वैसे भी यह मेरा फैसला नहीं है। अंपायर ने उन्हें आउट दे दिया। मुझे अपील वापस लेने में बहुत देर हो चुकी है। खेल जारी है। हम सभी जानते हैं कि यह एक हादसा है, लेकिन क्रिकेट हादसों से भरा है। इसे सुधारना कप्तानों के ऊपर नहीं है।
तेंदुलकर गेंद को मिड विकेट पर खेलने के बाद तीसरे रन के लिए दौड़े थे। नदीम खान फील्डर थे और वह डायरेक्ट थ्रो पर विकेट को हिट करने में सफल रहे थे। तेंदुलकर गेंद को देख रहे थे और उन्होंने देखा कि शोएब रास्ते में आ गए हैं। तेंदुलकर के क्रीज पर पहुंचने से ठीक पहले दोनों टकरा गए। नदीम ने बाद में स्वीकार किया कि डायरेक्ट थ्रो एक संयोग था।