टी20 विश्व कप 2026 की शुरुआत जितनी विवादों और राजनीतिक बयानबाजी के साथ हुई थी, उसका अंत उतना ही शानदार अंदाज में भारत की जीत के साथ हुआ। टूर्नामेंट के शुरुआती दिनों में बांग्लादेश और पाकिस्तान के रुख ने वैश्विक क्रिकेट को असहज कर दिया था, लेकिन तमाम विवादों के बावजूद भारत ने मैदान पर अपनी ताकत दिखाते हुए फाइनल में न्यूजीलैंड को हराकर खिताब अपने नाम कर लिया। दरअसल, इस विश्व कप की शुरुआत क्रिकेट से ज्यादा राजनीतिक और कूटनीतिक तनातनी के कारण चर्चा में रही। विवाद की चिंगारी आईपीएल 2026 की नीलामी से भड़की, जिसने बाद में विश्व कप तक असर दिखाया।
बीसीसीआई सचिव सैकिया और मुस्तफिजुर रहमान
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कैसे भड़का था विवाद?
16 दिसंबर 2025 को अबु धाबी में आईपीएल 2026 की मिनी नीलामी के दौरान कोलकाता नाइट राइडर्स ने बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को 9.20 करोड़ रुपये में खरीद लिया। हालांकि जल्द ही यह फैसला विवादों में घिर गया। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हिंसा की खबरों के बीच भारत में इसका विरोध शुरू हो गया। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक आलोचना होने लगी और खासतौर पर केकेआर के मालिक शाहरुख खान निशाने पर आ गए।
मामला बढ़ने पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को हस्तक्षेप करना पड़ा। 3 जनवरी 2026 को बीसीसीआई ने केकेआर को निर्देश दिया कि वह मुस्तफिजुर रहमान को टीम से रिलीज करे। इसके बाद फ्रेंचाइजी ने आधिकारिक तौर पर उन्हें टीम से बाहर कर दिया।
बांग्लादेश के पूर्व खेल सलाहकार आसिफ नजरुल और बीसीबी अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम
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बांग्लादेश ने सुरक्षा का मुद्दा उठाया
इस फैसले के बाद बांग्लादेश की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने भारत में सुरक्षा का हवाला देते हुए टी20 विश्व कप के अपने मुकाबले भारत के बजाय श्रीलंका में कराने की मांग कर दी। बीसीबी की इस मांग को लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने सुरक्षा स्थिति की समीक्षा भी कराई, लेकिन भारत में सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की कमी नहीं पाई गई। इसके बावजूद बांग्लादेश अपने रुख पर कायम रहा।
आखिरकार आईसीसी ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया कि तय कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं होगा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर बांग्लादेश टीम भारत में खेलने से इनकार करती है तो उसकी जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल किया जाएगा। इसके बाद बांग्लादेश विश्व कप से बाहर हो गया।
अमीनुल इस्लाम-जय शाह-मोहसिन नकवी
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बेवजह कूदा पाकिस्तान
बांग्लादेश विवाद के बीच पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड भी अचानक इस मामले में कूद पड़ा। पीसीबी ने आईसीसी को पत्र लिखकर बांग्लादेश की मांग का समर्थन किया और भारत में सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। इसके बाद पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने यहां तक संकेत दे दिए कि पाकिस्तान टीम भी विश्व कप का बहिष्कार कर सकती है। पाकिस्तान सरकार ने शुरुआत में भारत के खिलाफ ग्रुप मैच नहीं खेलने का फैसला भी किया।
आईसीसी अध्यक्ष जय शाह और पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी
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आईसीसी के दबाव में पाकिस्तान का यू-टर्न
हालांकि, हालात ज्यादा देर तक ऐसे नहीं रहे। आईसीसी, पीसीबी और बीसीबी के बीच कई दौर की बातचीत के बाद पाकिस्तान सरकार बैकफुट पर आ गई। अंततः प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने निर्देश दिया कि पाकिस्तान टीम तय कार्यक्रम के अनुसार भारत के खिलाफ मैच खेलेगी। इस तरह शुरुआती दौर में जिस विश्व कप पर राजनीतिक बयानबाजी और विवादों का साया था, वह धीरे-धीरे क्रिकेट के मैदान पर लौट आया।
पाकिस्तान टीम
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सुपर-8 से ही पाकिस्तान हो गया बाहर
बड़े बोल बोलने वाला पाकिस्तान सुपर-8 चरण से ही टूर्नामेंट से बाहर हो गया। श्रीलंका के खिलाफ खेले अपने आखिरी मुकाबले में टीम ने पांच रन से जीत दर्ज की थी, लेकिन टीम सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सकी। ग्रुप स्टेज में पाकिस्तान की टीम ग्रुप-ए का हिस्सा थी। चार मैचों में टीम ने तीन मैच जीते और छह अंक हासिल किए। उसे भारत के हाथों करारी शिकस्त मिली। इसके बाद टीम सुपर-8 में पहुंची और ग्रुप-2 का हिस्सा बनी। जहां उसे तीन मैचों में सिर्फ एक जीत मिली। एक मैच बारिश के कारण बेनतीजा रहा और एक मुकाबले में पाकिस्तान हार गया।
भारतीय टीम
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अंत में मैदान पर बोला भारत का दम
टूर्नामेंट आगे बढ़ने के साथ विवाद पीछे छूटते गए और क्रिकेट ने फिर से केंद्र में जगह बना ली। पाकिस्तान सुपर-8 की दौड़ से बाहर हो गया, जबकि बांग्लादेश पहले ही टूर्नामेंट से बाहर था। अंततः अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर टी20 विश्व कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया। इस तरह जिस टूर्नामेंट की शुरुआत विवाद, राजनीति और बहिष्कार की धमकियों के साथ हुई थी, उसका अंत भारत की शानदार जीत और क्रिकेट के जश्न के साथ हुआ।