मजबूतीः न्यूजीलैंड टीम के पास डेवोन कॉन्वे और टॉम लाथम के रूप में उनके पास दो भरोसेमंद बल्लेबाज हैं। केन विलियमसन भी सूत्रधार की भूमिका निभा सकते हैं जो पिछले दो मैचों से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, रचिन रवींद्र ने इस चैंपियंस ट्रॉफी में दो शतक लगाए हैं और सेमीफाइनल में भी उनका बल्ला जमकर चला था। मध्यक्रम में डेरिल मिचेल और फिलिप्स मैच विजेता हैं।
कमजोरीः न्यूजीलैंड ने भारत के खिलाफ पिछले मैच में मैट हेनरी के पांच विकेट की बदौलत भारतीय टीम को 249 रनों पर रोक दिया था, लेकिन लक्ष्य का पीछा करते हुए अच्छी स्थिति में होने के बावजूद टीम की पारी लड़खड़ा गई थी और उसे हार का सामना करना पड़ा था। अगर हेनरी कंधे की समस्या से नहीं उबर सके तो उसका गेंदबाजी लाइन अप भी कमजोर नजर आएगा। न्यूजीलैंड की टीम पिछले मैच में स्पिनरों का सामना नहीं कर पा रही थी और एक बार फिर उसके सामने वरुण, अक्षर, जडेजा और कुलदीप जैसे स्पिनरों की चुनौती होगी।
अवसरः केन विलियमसन ने कहा है कि न्यूजीलैंड की टीम इस बार दुबई की परिस्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहेगी। ऐसे में टीम के पास 25 साल बाद सीमित ओवर के प्रारूप में आईसीसी का कोई टूर्नामेंट जीतने का मौका रहेगा। कीवी टीम पिछले कुछ समय से कई बार आईसीसी टूर्नामेंट के नॉकआउट में पहुंची है, लेकिन खिताब जीतने से चूक गई है। न्यूजीलैंड ने 2015 और 2019 वनडे विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन दोनों ही बार उसे हार मिली।
खतराः न्यूजीलैंड का सामना ऐसी भारतीय टीम से है जो टूर्नामेंट में अजेय बनी हुई है। बल्ले, गेंद और फील्डिंग में भारतीय टीम ने जोरदार प्रदर्शन किया है। दूसरी ओर, दुबई में भारतीयों की अच्छी संख्या है जिससे खिताबी मैच के दौरान स्टेडियम में भारत के लिए समर्थन अधिक रहेगा। सैंटनर की टीम के लिए भारत को खिताब से रोकना एक बड़ी चुनौती है।