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IND vs ENG: हार्दिक की सात साल से टेस्ट टीम में क्यों नहीं हो रही वापसी? बैटिंग-बॉलिंग दोनों में शानदार आंकड़े

Thu, 17 Jul 2025 01:02 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

हार्दिक ने पिछला टेस्ट मैच अगस्त 2018 में इंग्लैंड के खिलाफ रोज बाउल में खेला था। इसके बाद सात साल से वह वनडे और टी20 तो खेल रहे हैं, लेकिन टेस्ट से गायब हैं।
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हार्दिक पांड्या कब करेंगे टेस्ट में वापसी? - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज जारी है। लॉर्ड्स में खेले गए तीसरे टेस्ट में हार के बाद भारतीय टीम सीरीज में 1-2 से पीछे चल रही है। 23 जुलाई से मैनचेस्टर में चौथा मैच की शुरुआत होगी। सीरीज फिलहाल रोमांचक मोड़ पर है और लॉर्ड्स में मैदान में हुए हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद यह और दिलचस्प हो गई है। दोनों टीमों की ओर से काफी स्लेजिंग हुई और मैनचेस्टर में भारत के पास इसका मुंहतोड़ जवाब देने का सही मौका है। लॉर्ड्स में भले ही भारतीय टीम की गेंदबाजी अच्छी रही हो, लेकिन विदेशी मैदान पर एक अच्छे पेस बॉलिंग ऑलराउंडर की खोज अब तक जारी है।
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लीड्स में पहले टेस्ट में टीम मैनेजमेंट ने शार्दुल ठाकुर को मौका दिया था, जबकि दूसरे और तीसरे टेस्ट में नीतीश रेड्डी खेले। उन्होंने लॉर्ड्स में अच्छी गेंदबाजी की, लेकिन उनकी बल्लेबाजी फ्लॉप रही। ऐसे में सवाल उठता है कि सात साल से हार्दिक पांड्या की टेस्ट टीम में वापसी क्यों नहीं हो रही है? उन्होंने अभी तक किसी प्रारूप से संन्यास नहीं लिया है, तो क्या बीसीसीआई को उन्हें टेस्ट खेलने के लिए नहीं मनाना चाहिए? अगर वह खेलते हैं तो भारतीय टीम पहले से कहीं ज्यादा मजबूत दिखेगी। टेस्ट में उनकी बैटिंग और बॉलिंग, दोनों शानदार रही है। आंकड़े इसके गवाह हैं। वह विदेशी मैदान पर एक बेहतरीन तेज गेंदबाजी विकल्प साबित हो सकते हैं।

2017 में हार्दिक ने किया था टेस्ट डेब्यू

हार्दिक पांड्या कब करेंगे टेस्ट में वापसी? - फोटो : ANI
हार्दिक ने  2016 में टी20 मैच से अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था। फिर उसी साल अक्तूबर में वनडे डेब्यू किया। इसके बाद 2017 में श्रीलंका के खिलाफ गॉल में उनका टेस्ट डेब्यू हुआ। हालांकि, एक साल बाद ही वह टेस्ट से गायब हो गए। हार्दिक ने पिछला टेस्ट मैच अगस्त 2018 में इंग्लैंड के खिलाफ रोज बाउल में खेला था। इसके बाद सात साल से वह वनडे और टी20 तो खेल रहे हैं, लेकिन टेस्ट से गायब हैं। साल 2018 में ही सितंबर में एशिया कप के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ मैच में उन्हें गंभीर चोट लगी थी और वह स्ट्रेचर से बाहर आए थे।

इससे उबरने में उन्हें काफी समय लग गया था, लेकिन वापसी के बाद से वह सबसे लंबे प्रारूप में नहीं खेल पाए। हार्दिक को समय-समय पर लगती चोट टेस्ट मे नहीं खेलने की मुख्य वजह हो सकती है, लेकिन जब देश को उनकी जरूरत हो और टीम में एक सीनियर सदस्य के नाते उन्हें खेलने के लिए मनाना चाहिए। नीतीश ने टेस्ट डेब्यू के बाद से अब तक सात टेस्ट की 12 पारियों में 72 ओवर गेंदबाजी की है, यानी औसतन छह ओवर। हार्दिक भी इतनी गेंदबाजी कर सकते हैं और उनकी स्पीड और स्विंग विदेशी जमीन पर घातक भी साबित हो सकती है।

हार्दिक का टेस्ट में प्रदर्शन



हार्दिक ने अब तक 11 टेस्ट में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और उसमें 31.29 की औसत से 532 रन बनाए हैं। इसमें चार अर्धशतक और एक शतक शामिल है। श्रीलंका के खिलाफ गॉल में 108 रन, उनकी टेस्ट में सर्वश्रेष्ठ पारी रही है। टेस्ट डेब्यू पर ही अपनी पहली पारी में हार्दिक ने अर्धशतक जमाया था। इतना ही नहीं 2018 में वह भारतीय टीम के साथ इंग्लैंड का दौरा भी कर चुके हैं। तब उन्होंने चार टेस्ट की आठ पारियों में 23.43 की औसत से 164 रन बनाए थे। सबसे शानदार उनकी गेंदबाजी रही थी।

उस सीरीज में उन्होंने आठ पारियों में 64 ओवर गेंदबाजी की थी (औसतन एक पारी में आठ ओवर) और 10 विकेट झटके थे। इस दौरान उनका गेंदबाजी औसत 24.70 का और स्ट्राइक रेट 38.50 का रहा था। गेंदबाजी औसत का मतलब है प्रति विकेट कितने रन खर्च किए गए। वहीं, गेंदबाजी स्ट्राइक रेट का मतलब है प्रति विकेट कितनी गेंद फेंकी। हार्दिक का उस सीरीज में गेंदबाजी स्ट्राइक रेट मोईन अली के बाद सबसे शानदार रहा था। हार्दिक ने अब तक 11 टेस्ट में 17 विकेट झटके हैं। 28 रन देकर पांच विकेट उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी रही है। उनका गेंदबाजी औसत 31.05 का और स्ट्राइक रेट 55.1 का रहा है।
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क्या बुमराह की तरह मैनेज हो सकता है वर्कलोड?



हार्दिक समय-समय पर चोटिल होते रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि उनको मौका नहीं दिया जा सकता। जिस प्रकार जसप्रीत बुमराह के वर्कलोड को मैनेज किया जाता है, उस प्रकार हार्दिक के वर्कलोड को भी मैनेज किया जा सकता है, लेकिन इसके पीछे मुख्य वजह क्या है, यह तो बीसीसीआई और टीम मैनेजमेंट ही बता सकता है। हार्दिक को मौजूदा समय में देश का सबसे बेहतरीन पेस बॉलिंग ऑलराउंडर माना जाता है और इसमें कोई शक भी नहीं है। हार्दिक और बुमराह, इन दो खिलाड़ियों ने जिस प्रकार भारतीय क्रिकेट में अपनी धाक जमाई, वह अपने आप में शानदार है। उन्हें टी20 का कप्तान भी बनाया गया, लेकिन गौतम गंभीर के कोच बनते ही उनसे यह पद छीन लिया गया।

हार्दिक का प्रथम श्रेणी में भी रिकॉर्ड शानदार है। उन्होंने 29 प्रथम श्रेणी मैच में 30.02 की औसत से 1351 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने एक शतक और 10 अर्धशतक लगाए। वहीं, प्रथम श्रेणी में उनके नाम 48 विकेट भी हैं। एक और खास बात यह है कि हार्दिक ने 11 में से सिर्फ एक टेस्ट भारत में खेला है। उनके बाकी के 10 मुकाबले विदेशी जमीन पर ही रहे हैं। वह भारतीय टीम के साथ श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड का दौरा कर चुके हैं। भारतीय पिच पर एक एक्स्ट्रा पेसर की जगह स्पिन ऑलराउंडर की जरूरत पड़ती है। ऐसे में उन्हें आराम दिया जा सकता है, लेकिन विदेशी दौरों पर वह टीम इंडिया के बहुमूल्य साबित हो सकते हैं। साथ ही वह भारतीय टेस्ट टीम को जरूरी संतुलन भी प्रदान कर सकते हैं।

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