बिहार के समस्तीपुर जिले का छोटा सा कस्बा ताजपुर, जहां आज भी जिंदगी की रफ्तार चाय की दुकानों और खेत-खलिहानों के बीच चलती है, अब भारतीय क्रिकेट के नक्शे पर स्थायी पहचान बना चुका है। कभी शांत और साधारण रहा यह इलाका अब एक नई वजह से पूरे देश में जाना जाता है, 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का घर।
आईपीएल में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से सुर्खियां बटोरने वाले वैभव ने अब एक और बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में टीम इंडिया के लिए डेब्यू करते ही उन्होंने भारतीय क्रिकेट इतिहास में सबसे कम उम्र में टी20 अंतरराष्ट्रीय खेलने वाले खिलाड़ी का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। महज 15 साल 99 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखकर वैभव ने यह साबित कर दिया कि उनकी कहानी अभी सिर्फ शुरू हुई है।
वैभव भारत के लिए डेब्यू करने वाले सबसे युवा क्रिकेटर
- फोटो : BCCI
आईपीएल से इंटरनेशनल तक का सफर
वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से सभी का ध्यान खींचा था। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजों में शामिल जसप्रीत बुमराह के एक ओवर में लगातार दो छक्के लगाने के बाद क्रिकेट जगत को एहसास हो गया था कि यह खिलाड़ी बड़े मंच के लिए तैयार है। आईपीएल में उनके लिए जो उत्साह और दीवानगी देखने को मिली, वह किसी युवा खिलाड़ी के लिए बेहद दुर्लभ थी। अब वही प्रदर्शन उन्हें भारतीय टीम तक ले आया। इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करना उनके करियर का सबसे बड़ा पड़ाव माना जा रहा है।
पीएम मोदी के साथ वैभव और उनका परिवार
- फोटो : ANI
पिता का अधूरा सपना, बेटे ने किया पूरा
वैभव सूर्यवंशी की कहानी उनके पिता संजीव सूर्यवंशी के बिना अधूरी है। संजीव खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन उस समय बिहार को बीसीसीआई से मान्यता नहीं मिलने के कारण उनका सपना अधूरा रह गया। रोजगार की तलाश में उन्होंने मुंबई का रुख किया। वहां शिपिंग यार्ड में काम किया, पोर्ट पर मजदूरी की और जरूरत पड़ने पर नाइट क्लब में बाउंसर तक बने। अभिनय का भी शौक था, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों ने उन्हें अलग राह चुनने पर मजबूर कर दिया।
करीब एक दशक के संघर्ष के बाद संजीव वापस ताजपुर लौटे और पारिवारिक ज्वेलरी की दुकान संभालने लगे, लेकिन क्रिकेट के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने वही सपना अपने बेटे की आंखों में देखा और उसे पूरा करने का संकल्प लिया।
पीएम मोदी के साथ वैभव और उनका परिवार
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100 किलोमीटर साइकिल चलाकर टूर्नामेंट का फॉर्म लाते थे
संजीव सूर्यवंशी का क्रिकेट के प्रति जुनून इस बात से समझा जा सकता है कि किशोरावस्था में वह हर साल करीब 100 किलोमीटर साइकिल चलाकर पटना सिर्फ एक क्रिकेट टूर्नामेंट का फॉर्म लेने जाते थे। यही जज्बा उन्होंने वैभव के भीतर भी पैदा किया।
चार साल की उम्र में हाथ में थमाया बल्ला
वैभव को उनके चौथे जन्मदिन पर पहला क्रिकेट बैट मिला। तभी से उनके खेल में कुछ अलग दिखाई देने लगा। 2018 के आसपास उनकी प्रतिभा खुलकर सामने आई तो संजीव ने एक बार फिर संघर्ष शुरू किया, लेकिन इस बार अपने बेटे के भविष्य के लिए।
वैभव सूर्यवंशी ने किया डेब्यू
- फोटो : BCCI
200 किलोमीटर का रोजाना सफर और पिता का त्याग
वैभव को बेहतर ट्रेनिंग दिलाने के लिए संजीव ने सेकंड-हैंड एसयूवी खरीदी। इसके बाद हर दूसरे दिन ताजपुर से पटना तक करीब 200 किलोमीटर का सफर तय किया जाने लगा। पटना के संपतचक स्थित जेन नेक्स्ट क्रिकेट अकादमी में कोच मनीष कुमार ओझा की देखरेख में वैभव ने अपनी बल्लेबाजी को निखारा। सुबह चार बजे घर से निकलना, तीन घंटे का सफर तय करना, अभ्यास करना और देर रात वापस लौटना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बन गई।
रोज 600 गेंद खेलते थे वैभव
कोच मनीष कुमार ओझा के अनुसार, जहां आमतौर पर युवा बल्लेबाजों को 200-250 गेंदें खिलाई जाती थीं, वहीं वैभव रोज करीब 600 गेंदों का सामना करते थे। उनकी ट्रेनिंग का सबसे बड़ा हिस्सा आक्रामक बल्लेबाजी था। उन्हें शुरुआत से ही सकारात्मक क्रिकेट खेलने, हर गेंद पर रन बनाने के विकल्प तलाशने और बड़े शॉट खेलने की मानसिकता विकसित कराई गई।
समस्तीपुर के मैदान से शुरू हुआ सफर
वैभव ने अपने शुरुआती क्रिकेट के दिन समस्तीपुर के एक बड़े मैदान में बिताए। उनके पहले कोच ब्रजेश झा बताते हैं कि नौ साल की उम्र में भी उनका खेल 14-15 साल के खिलाड़ी जैसा परिपक्व नजर आता था। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान भी विशेष अनुमति लेकर उनकी ट्रेनिंग जारी रखी गई, ताकि उनका अभ्यास प्रभावित न हो।
अनुकूल रॉय
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अनुकूल रॉय के बाद वैभव ने बदली तस्वीर
समस्तीपुर ने पहले भी अनुकूल रॉय जैसे क्रिकेटर दिए हैं, लेकिन वैभव सूर्यवंशी के उभरने के बाद जिले में क्रिकेट का माहौल पूरी तरह बदल गया। आज उसी मैदान पर चार से सात साल तक के दर्जनों बच्चे नियमित अभ्यास कर रहे हैं। कोचों का कहना है कि वैभव की सफलता के बाद क्रिकेट सीखने वाले बच्चों की संख्या कई गुना बढ़ गई है।
अब ताजपुर सिर्फ कस्बा नहीं, क्रिकेट की नई पहचान
आईपीएल के बाद ताजपुर में मीडिया की आवाजाही लगातार बढ़ी और अब टीम इंडिया में डेब्यू के बाद यह उत्साह और भी बढ़ गया है। पटना से समस्तीपुर आने वाले लोग अब अक्सर सिर्फ एक सवाल पूछते हैं, 'वैभव सूर्यवंशी का घर किधर है?' एक समय तक अपनी सादगी के लिए पहचाना जाने वाला ताजपुर आज बिहार के क्रिकेट मानचित्र पर नई पहचान बन चुका है।
तिलक वर्मा-वैभव सूर्यवंशी
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15 साल की उम्र में इंटरनेशनल डेब्यू, करोड़ों उम्मीदों का चेहरा
आईपीएल में मिली पहचान के बाद वैभव पर करोड़ों रुपये की बोली और बड़ी उम्मीदों की चर्चा हुई थी। लेकिन टीम इंडिया में डेब्यू के साथ उन्होंने यह साबित कर दिया कि उन पर जताया गया भरोसा बेवजह नहीं था। महज 15 साल 99 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले वैभव अब सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय क्रिकेट के भविष्य के सबसे बड़े सितारों में गिने जा रहे हैं।
विश्व क्रिकेट के सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर
- फोटो : Twitter
एक परिवार, एक सपना और नई उड़ान
वैभव सूर्यवंशी की कहानी सिर्फ क्रिकेट की सफलता नहीं है। यह एक पिता के अधूरे सपने, एक परिवार के त्याग, वर्षों की मेहनत और छोटे शहर से बड़े सपने देखने की हिम्मत की कहानी है। ताजपुर की गलियों से लेकर मैनचेस्टर के अंतरराष्ट्रीय मैदान तक का उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि अगर जुनून, मेहनत और परिवार का साथ हो तो संसाधनों की कमी भी मंजिल नहीं रोक सकती। इंग्लैंड के खिलाफ टीम इंडिया के लिए डेब्यू के साथ वैभव सूर्यवंशी ने अपने सफर का नया अध्याय शुरू कर दिया है। अब पूरे देश की निगाहें इस युवा बल्लेबाज पर हैं, जिसने कम उम्र में ही यह भरोसा जगा दिया है कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।