भारत और इंग्लैंड के बीच जारी पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का चौथा मुकाबला मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड स्टेडियम पर खेला जा रहा है। इस मैच से पहले लंकाशर क्रिकेट क्लब ने फारुख इंजीनियर और क्लाइव लॉयड को सम्मानित किया। क्लब ने 'बी स्टैंड' को सर क्लाइव लॉयड और फारुख इंजीनियर स्टैंड कर दिया गया।
इंजीनियर ने जताई खुशी
इंजीनियर विदेशी मैदान पर यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय बन गए। उन्होंने कहा, 'यह सिर्फ मेरे लिए ही नहीं बल्कि भारत के लिए भी गर्व का क्षण है। क्लाइव और मैं दोनों सुबह इसके बारे में बात कर रहे थे। हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे सम्मान में ऐसा कुछ किया जाएगा। ईश्वर महान है। अपने देश में पहचान नहीं मिलने की कमी पूरी हुई।'
लंकाशर के लिए 219 मैच खेले लॉयड
वेस्टइंडीज के साथ दो बार विश्व कप विजेता कप्तान रहे लॉयड ने 1968 और 1986 के बीच लंकाशर के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 219 मैच खेले। उन्होंने 12,764 रन बनाए और 55 विकेट लिए। क्लब के लिए लिस्ट ए क्रिकेट में लॉयड ने 8,522 रन और 60 विकेट लिए। उन्होंने लंकाशर की एक दिवसीय सफलताओं में बड़ा योगदान देते हुए 1969 और 1970 में दो एक दिवसीय लीग खिताब जीते। उन्होंने 1970 और 1975 के बीच चार जिलेट कप जीते जिसमें 1972 के लॉर्ड्स में वॉरविकशर के खिलाफ 126 रन की यादगार पारी शामिल है।
लॉयड और इंजीनियर ने लंकाशर को दिलाई अलग पहचान
भारत के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी इंजीनियर लंकाशर के विकेटकीपर थे जिन्होंने 1968 से 1976 तक क्लब का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने क्लब के लिए 175 मैच खेले जिनमें 5,942 रन बनाने के साथ 429 कैच लिए और 35 स्टंपिंग की।इंजीनियर के बल्ले से शानदार प्रदर्शन और स्टंप के पीछे उनके अद्भुत कौशल ने लंकाशर में एक स्वर्णिम युग की शुरुआत की जो 1970 के दशक में एकदिवसीय मैचों का बादशाह था। जब लॉयड और इंजीनियर ने लंकाशर के लिए पदार्पण किया तब क्लब ने 1950 के बाद से कोई बड़ा खिताब नहीं जीता था, लेकिन आठ साल बाद 1970, 1971, 1972 और 1975 में चार बार जिलेट कप और 1969 और 1970 में दो बार जॉन प्लेयर लीग खिताब जीते। लॉयड और इंजीनियर दोनों ओल्ड ट्रैफर्ड के उपाध्यक्ष हैं और यह जोड़ी 2020 में आयोजित एक विशेष समारोह में क्लब के हॉल ऑफ फेम में शामिल होने वाले पूर्व खिलाड़ियों के पहले ग्रुप में शामिल थी।