भारत और इंग्लैंड के बीच लीड्स के हेडिंग्ले में खेले जा रहे टेस्ट में यशस्वी जायसवाल और शुभमन गिल ने शतक जड़ मेजबान टीम को चौंका दिया। इंग्लिश कप्तान बेन स्टोक्स ने काफी उम्मीदों के साथ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया था, लेकिन गिल और यशस्वी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। यशस्वी 101 रन बनाकर आउट हुए। वहीं, कप्तान गिल 127 रन बनाकर नाबाद हैं। उनके साथ उपकप्तान ऋषभ पंत 65 रन बनाकर क्रीज पर हैं। गिल और यशस्वी ने इस टेस्ट में काफी प्रभावित किया। 92 रन पर दो विकेट गिर जाने के बाद दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 129 रन की साझेदारी निभाई। यशस्वी जब बल्लेबाजी कर रहे थे तो गिल ने प्लेमेकर की भूमिका निभाई और संभल कर शॉट्स खेले। जैसे ही यशस्वी आउट हुए तो गिल ने शॉट्स लगाने शुरू किए और टेस्ट करियर का छठा शतक जड़ा। 'प्रिंस' के नाम से मशहूर गिल अब 'किंग' विराट कोहली के नक्शेकदम पर चल चुके हैं। ऐसा हम नहीं कह रहे, बल्कि दोनों के स्टैट में समानता से पता चलता है।
आइए जानते हैं...
1. कप्तानी से पहले दोनों का औसत 40 से नीचे था
इंग्लैंड के खिलाफ पहला टेस्ट बतौर कप्तान गिल का पहला टेस्ट है। बतौर कप्तान अपनी डेब्यू पारी में ही गिल ने शतक जड़ दिया। गिल का टेस्ट में औसत 37.41 का है और इस टेस्ट से पहले उनका औसत 35.06 का था। ठीक उसी तरह जैसे कोहली का बतौर कप्तान डेब्यू से पहले औसत 40 से नीचे थे। कोहली का टेस्ट में बतौर कप्तान पहला मैच ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 2014 में आया था। भारत ने 2014 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर एडिलेड में पहला मैच ही कोहली की कप्तानी में खेला था। इस टेस्ट की पहली पारी में कोहली ने 115 रन बनाए थे। इस मैच से पहले कोहली का टेस्ट में औसत 39.47 का था। इसके बाद कोहली ने टेस्ट में कई रिकॉर्ड्स बनाए। गिल से भी यही उम्मीद की जा रही है।
2. कप्तानी डेब्यू पर शतक
गिल ने बतौर कप्तान अपने पहले ही मैच की पहली पारी में शतक जड़ दिया। किंग कोहली ने भी 2014 में ऐसा किया था। उन्होंने तब पहली पारी में 115 रन बनाने के अलावा दूसरी पारी में भी 141 रन बनाए थे। अब यह देखने वाली बात होगी कि अगर भारत को दूसरी पारी में खेलने का मौका मिलता है तो गिल कैसा प्रदर्शन करते हैं। एक चीज जो और देखने वाली रही, बतौर कप्तान डेब्यू पर शतक के वक्त दोनों के हाथ में एमआरएफ का ही बल्ला रहा।
कोहली और शुभमन
- फोटो : ANI/PTI
3. बल्लेबाजी क्रम बदलता रहा
गिल ने टेस्ट करियर की शुरुआत ओपनर के तौर पर की थी। फिर पुजारा के हटने और यशस्वी के आने के बाद उन्हें तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करनी पड़ी। अब वह भारत के नए नंबर चार हैं। ठीक इसी तरह कोहली के बल्लेबाजी क्रम में भी काफी बदलाव हुए थे। कोहली ने 2011 में टेस्ट डेब्यू छठे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए किया था। फिर उन्हें 2012 में पांचवें नंबर पर भेजा जाने लगा। 2012 के जनवरी में राहुल द्रविड़ के संन्यास के बाद तीसरा स्थान खाली हुआ तो बीच-बीच में उन्हें नंबर तीन पर भी बल्लेबाजी करनी पड़ी। हालांकि, 2013 में सचिन के संन्यास के बाद कोहली को पूरी तरह नंबर चार दे दिया गया। अब कोहली के संन्यास पर शुभमन को यह स्थान दिया गया है। सचिन से कोहली और कोहली से गिल तक यह परंपरा चली आ रही है।
4. नंबर-4 पर बल्लेबाजी करते हुए अपनी पहली पारी में ही शतक
गिल ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पिछली टेस्ट सीरीज तक तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी की थी। हालांकि, कोहली के संन्यास के बाद टीम मैनेजमेंट को उन्हें चौथे नंबर पर भेजने का कॉल लेना पड़ा और यह सही साबित हुआ। गिल ने नंबर चार पर अपनी पहली ही पारी में शतक जड़ दिया। कोहली ने भी 2013 में ऐसा ही किया था। 2013 में दक्षिण अफ्रीका के दौरे से पहले कोहली ने कभी नंबर चार पर बल्लेबाजी नहीं की थी। वांडरर्स में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नंबर चार पर डेब्यू करते हुए कोहली ने अपनी पहली ही पारी में 119 रन बनाए थे।
5. बतौर खिलाड़ी फेल, लेकिन कप्तान बनते ही बदला अंदाज
गिल का इससे पहले न सिर्फ इंग्लैंड में बल्कि किसी SENA देश में अच्छा रिकॉर्ड नहीं था। इंग्लैंड में इस टेस्ट से पहले केवल बतौर बल्लेबाज खेलते हुए छह पारियों में उन्होंने केवल 88 रन बनाए थे। हालांकि, कप्तान बनते ही गिल का अंदाज बदल गया और उन्होंने इंग्लैंड में अपनी पहली ही पारी में शतक जड़ दिया। यह ठीक उसी तरह है जैसे किंग कोहली ने बतौर कप्तान बनते ही इंग्लैंड में धमाल मचाया था। 2014 में जुलाई में जब टीम इंडिया ने इंग्लैंड का दौरा किया था तो कोहली बतौर बल्लेबाज फ्लॉप साबित हुए थे। यह सीरीज उनके लिए डरावने सपने की तरह थी। वह तब 10 पारियों में 134 रन बना पाए थे। हालांकि, इसके बाद जब टीम इंडिया ने 2018 में कोहली के कप्तान रहते हुए इंग्लैंड का दौरा किया तो किंग के तेवर बदले हुए थे। यह बतौर कप्तान कोहली का पहला इंग्लैंड दौरा था और वह सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे थे। इस सीरीज में कोहली ने 10 पारियों में 593 रन बनाए थे। इतना ही नहीं, कोहली ने बतौर कप्तान इंग्लैंड में अपनी पहली ही पारी में 149 रन (बर्मिंघम टेस्ट, 2018) बनाए थे। प्रिंस गिल से भी यही उम्मीद की जा रही है।
6. कप्तान के रूप में अपने पहले ही मैच में पूरे किए 2000 टेस्ट रन
गिल ने शुक्रवार को 127 रन की नाबाद पारी के दौरान टेस्ट में 2000 रन भी पूरे कर लिए। उन्हें ऐसा करने के लिए 107 रन की जरूरत थी। प्रिंस गिल की तरह साल 2014 में कोहली ने भी बतौर कप्तान अपना पहला मैच खेलते ही टेस्ट में 2000 रन पूरे किए थे। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2014 में एडिलेड टेस्ट से पहले कोहली के 1855 रन थे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहली पारी में 115 रन और दूसरी पारी में 141 रन बनाए। दूसरी पारी में 30 रन बनाते ही कोहली ने टेस्ट में 2000 रन पूरे कर लिए थे। इसे अब संयोग कहें या कुछ और, लेकिन ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रिंस किंग की राह पर चलने को तैयार हैं। इतना ही नहीं, भारत को एक नया सितारा भी मिल गया है।