आईपीएल की शुरुआत को महज चार दिन हुए हैं और चोटिल क्रिकेटरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मिचेल मार्श (सनराइजर्स) और रविचंद्रन अश्विन (कैपिटल्स) आईपीएल मैचों के दौरान चोटिल हुए, जबकि इशांत शर्मा (कैपिटल्स), केन विलियम्सन (सनराइजर्स), क्रिस मोरिस (आरसीबी), नॉथन कुल्टरनाइल (मुंबई इंडियंस), ड्वेन ब्रावो (सीएसके) लीग की तैयारियों के दौरान अनफिट हो गए। स्पोर्ट्स मेडिसिन विशेषज्ञों के अनुसार इस आईपीएल में क्रिकेटरों के चोटिल होने की संख्या काफी ज्यादा बढने वाली है। इसका कारण क्रिकेटरों का मैच फिट नहीं होना तो है ही साथ में एकांतवास की मानसिक थकावट क्रिकेटरों की फिटनेस पर बड़ा असर डालने जा रही है। स्पोर्ट्स मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अशोक आहुजा का मानना है कि क्रिकेटरों की 'आईसोलेशन फिटनेस’ पर ध्यान नहीं दिया गया तो आईपीएल में फ्रेंचाइजी की मुश्किलें काफी बढ़ेंगी।
एकांतवास की मानसिक थकावट डालेगी असर
एशियन क्रिकेट काउंसिल और बीसीसीआई के साथ रह चुके डॉ. आहुजा खुलासा करते हैं कि जिस तरह का जैव सुरक्षा वातावरण बनाया गया है उससे क्रिकेटरों की मानसिक थकावट बढ़ेगी और रिकवरी भी प्रभावित होगी। क्रिकेटर पहले से ही छह माह से नहीं खेले हैं। ऊपर से उन्होंने 14 दिन का एकांतवास काटा है, साथ ही जैव सुरक्षा वातावरण में होटल में एक दूसरे के कमरे में जाने की इजाजत तो छोड़ें पास बैठने की भी अनुमति नहीं है। सब कुछ अकेले करना है। क्रिकेटर इसके आदी नहीं हैं। इससे क्रिकेटरों की मानसिक फिटनेस पर असर पड़ेगा जो मैदान पर असर दिखाएगी। इसका उदाहरण वह सीएसके के ऋतुराज गायकवाड़ को बताते हैं। वह पहली ही गेंद पर आउट हो गए। उन पर एकांतवास का बोझ सवार था। जिससे उनकी मानसिक फिटनेस प्रभावित हुई। इसी को आइसोलेशन फिटनेस का नाम दिया गया है। जिसे दूर करना बेहद जरूरी है।
आईपीएल में क्रिकेटरों का नहीं हुआ यो-यो टेस्ट
डॉ. आहुजा के मुताबिक इतने लंबे समय तक क्रिकट से दूर रहने के बाद क्रिकेटरों की मैच फिटनेस, सामर्थ्य और शक्ति के अलावा लचीलापन प्रभावित हुआ। फिर यूएई का मौसम भी गर्म है। यह सभी क्रिकेटरों के चोटिल का होने का लक्षण है। जिन क्रिकेटरों ने लॉकडाउन में अपने शरीर पर मेहनत की है। उन्हें फायदा मिलेगा। डॉ. आहुजा खुलासा करते हैं कि आईपीएल में यो-यो टेस्ट अनिवार्य नहीं है। अगर इस वक्त सभी का यो-यो टेस्ट कराया जाए तो 80 प्रतिशत क्रिकेटर अनफिट निकलेंगे।
फीजियो का सीधे नहीं जाना भी दिक्कत
दिक्कत यह भी है फीजियो को सीधे क्रिकेटर के पास जाने की इजाजत नहीं है। जिससे उनकी रिकवरी भी प्रभावित होगी। पहले फीजियो क्रिकेटरों को सीधे मैदान पर ही खुद एक्सरसाइज कराते थे। अब क्रिकेटरों को यह खुद करना है। इसका भी फर्क पड़ता है। फीजियो को पीपीई किट पहनकर ही क्रिकेटरों के पास जाने की इजाजत है।