भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में टीम इंडिया को पहली बार बांग्लादेश के हाथों वनडे सीरीज गंवानी पड़ी है। साथ ही पहली बार टीम इंडिया ने इस पडो़सी देश से लगातार दो मैच भी गंवा दिए।
सीरीज के दूसरे मैच में मिली करारी हार के बाद टीम इंडिया के कप्तान धोनी रुआंसे तक हो गए और टीम हित में कप्तानी भी छोड़ने को तैयार हो गए। उन्होंने कहा कि टीम हित में वह कप्तानी छोड़ सकते हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान वह काफी भावुक नजर आए। उनकी बातों और चेहरे पर हार का गम साफ देखा जा सकता था। उन्होंने कहा कि हर बार उन्हें निशाना बनाया जाता है और वह हर जिम्मेदारी उठाने को तैयार है। हार के पीछे उन्होंने टीम के खराब प्रदर्शन को भी जिम्मेदार ठहराया।
धोनी की अगुवाई में टीम इंडिया की विदेशी धरती पर लगातार हार को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि इस सीरीज के बाद उनके बारे में बड़ा फैसला लिया जा सकता है। हालांकि पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर के अलावा सैयद किरमानी, चेतन चौहान और सौरव गांगुली अभी भी धोनी को बनाए रखने पर हैं। गावस्कर कहते हैं कि धोनी के पास काफी कुछ है टीम इंडिया को देने के लिए।
लेकिन यहां यह बात दीगर है कि धोनी की कप्तानी जाती है तो यह सिर्फ उनके लिए ही झटके जैसा नहीं होगा बल्कि उनके लिए भी खतरे की घंटी है जो बस धोनी से दोस्ती के कारण टीम इंडिया में बने हुए हैं।
कप्तानी गंवाने के बाद क्या टीम में भी बनेगी उनकी जगह!
बांग्लादेश के खिलाफ पहली बार वनडे सीरीज गंवाने के बाद कप्तान धोनी ने कप्तानी छोड़ने की बात कही है। उन्होंने कहा, "अगर मेरे कप्तानी छोड़ने से टीम इंडिया को फायदा होता है तो इसके लिए तैयार हूं।"
उनके इस बयान के बाद तो जैसे सभी क्रिकेट विशेषज्ञों का ध्यान उन्हीं पर केंद्रित हो गया। शुरू से ही यह माना जाता रहा है कि टीम में उनकी जगह बतौर कप्तान ही रही। हालांकि वह टीम में सबसे बेहतरीन फिनिशर भी माने जाते हैं लेकिन पिछले कुछ समय से उनकी बल्लेबाजी का स्तर भी गिरा है।
करियर की शुरुआत में सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी बल्लेबाजी देखने लायक होती थी। वह कई करारे शॉट भी लगाया करते थे। लेकिन अब उनकी बल्लेबाजी भी नहीं चलती और बतौर कप्तान टीम को ज्यादा जीत नहीं दिला पा रहे। ऐसे में अब सवाल यह भी है कि अगर धोनी वनडे मैचों में भी कप्तानी छोड़ देंगे तो क्या टीम में उनकी जगह बनी रहेगी?
अगर उनकी मैच जीताऊ पारी की बात की जाए तो उन्होंने आखिरी बार जुलाई 2013 में बल्ले से टीम के लिए ऐसी पारी खेली थी। उस समय वेस्टइंडीज में उन्होंने त्रिकोणीय सीरीज के फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ नाबाद 45 रन बनाए जिसकी बदौलत भारत यह सीरीज जीत पाया था। इस मैच तक वह हर 13 मैच में औसतन एक बार मैन ऑफ द मैच जरूर होते थे, लेकिन आज की बात की जाए तो वह 38 मैचों में एक बार भी मैच जीताऊ पारी नहीं खेल सके हैं।
भारत के पूर्व कप्तान और कोच रहे अजित वाडेकर कहते हैं कि इस सवाल का जवाब देना आसान नहीं है क्योंकि भारत में अगर कोई कप्तानी छोड़ दे तो उसका टीम में भी बने रहना मुश्किल हो जाता है। हालांकि इस बात के कुछ अपवाद जरूर हैं। वैसे भी जब टीम का प्रदर्शन अच्छा न हो तभी इस तरह की बातें उठती ही हैं।
पूर्व सलामी बल्लेबाज आकाश चोपडा कहते हैं, "धोनी ने बिलकुल ठीक कहा। अब यही टीम वर्ल्ड कप में अच्छा कर रही थी तो कप्तान का जादू चल रहा था। अगर कोई धोनी से पांच साल पहले पूछता तो भी वह यही कहते। अब उनके हटने से रातोंरात टीम का मंज़र बदल जाए तो उन्हें हटा दीजिए। अपने खेल में गिरावट के बावजूद वह अब भी बाकियों से बेहतर है। दूसरे मैच में वह खुद नंबर चार पर उतरे और मैच को बनाने की कोशिश की।"
धोनी की कप्तानी गई तो कौन-कौन जाएगा टीम इंडिया से बाहर
महेंद्र सिंह धोनी भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तान हैं और अपनी अगुवाई में वह टीम इंडिया को कई यादगार जीत दिला चुके हैं। फिलहाल उनका यह बेहद खराब समय चल रहा है। अगर चयनकर्ता उन्हें कप्तानी पद से मुक्त करते हैं तो टीम की उनकी जगह बनी रहे इसकी संभावना कम ही दिखती है।
धोनी की कप्तानी जाने की सूरत में टीम में ऐसे कई खिलाड़ी हैं जो खराब फॉर्म के बावजूद लंबे समय से टीम में बने हुए हैं। धोनी की अगुवाई में टीम अब तक जीत रही थी तो उनके खास खिलाड़ियों के टीम में होने पर किसी को कोई आपत्ति नहीं थी लेकिन कप्तान नहीं होने की स्थिति में उनके चहेते खिलाड़ियों को टीम में बने रहने में संकट खड़ा हो सकता है।
यहां बात कर रहे हैं रवींद्र जडेजा और आर अश्विन की जिनके प्रदर्शन में निरंतरता नहीं रहती फिर भी टीम में बने रहते हैं। खासकर जडेजा जिन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किए जमाना गुजर गया लेकिन वह टीम में लगातार बने हुए हैं। टीम में आलराउंडर की हैसियत से खेलते हैं लेकिन गेंद और बल्ले दोनों से ही कोई कमाल नहीं कर पा रहे। जडेजा पिछले 14 मैचों में एक बार भी 3 विकेट नहीं झटक सके हैं जबकि 16 वनडे में एक बार भी 35 रनों के आंकड़े को पार नहीं कर सके। ऐसे में टीम में उनकी जगह बनती नहीं दिख रही।
धोनी की आईपीएल टीम चेन्नई सुपर किंग्स के एक और साथी फिरकी गेंदबाज अश्विन जिनका प्रदर्शन कभी ठीक रहता है तो कभी बेहद खराब। वह बड़ी टीमों के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। बांग्लादेश के खिलाफ पहले मैच में उन्होंने 3 विकेट झटके जरूर लेकिन 51 रन भी लुटा दिए। वह कई मैचों से विपक्षी बल्लेबाजों पर अंकुश बनाए रखने में नाकाम रहे हैं।
इन दोनों के अलावा सुरेश रैना भी आउट ऑफ फॉर्म में होने के बावजूद टीम में अपनी जगह बनाए रखने में कामयाब रहे हैं। इस समय उनका बल्ला औसत ही चल रहा है लेकिन कई बार उनकी स्थिति बहुत अच्छी नहीं रही है। हालांकि धोनी के चहेतों सिर्फ रैना ही हैं जो ठीक-ठाक खेलते रहे हैं।
ऐसे में धोनी की कप्तानी जाती है तो खुद उनकी जगह टीम में बनी रहे इसकी संभावना कम ही दिखती है साथ ही जडेजा, अश्विन और रैना पर भी तलवार लटक सकती है।