थूक या लार के इस्तेमाल पर बैन, अब सिर्फ पसीने का उपयोग
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अनिल कुंबले की अगुवाई वाली क्रिकेट समिति की सिफारिशों को भी मान लिया गया है। यानी अब क्रिकेट में खिलाड़ी बार-बार गेंद पर थूक या लार का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। एक टीम को प्रति पारी दो बार तक चेतावनी जारी की जा सकती है, लेकिन लार के बार-बार उपयोग पर गेंदबाजी पक्ष को पांच रन की पेनल्टी लगेगी। अर्थात विरोधी टीम के खाते में पांच रन जोड़ दिए जाएंगे। इसके अलावा नए नियमों के मुताबकि गेंद को लार से चमकाने के तुरंत बाद अंपायर्स को उसे साफ करने के निर्दश दिए गए हैं। मतलब अब गेंद को स्विंग देने के लिए अब सिर्फ पसीने का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। खेल के दौरान जश्न मनाने के लिए न ही खिलाड़ी आपस में गले मिल सकेंगे और न ही हाथ मिला सकेंगे। यहां तक कि हर चौके-छक्के और विकेट के बाद उनका उत्साहवर्धन करने वाले फैंस भी स्टेडियम से नदारद होंगे। कोरोना संक्रमण को देखते हुए अब शुरुआती क्रिकेट गतिविधियां बिना दर्शकों के ही नजर आएंगी।
कोरोना संकट के कारण आर्थिक नुकसान उठा रहे बोर्ड को कमाई के लिए खिलाड़ियों की जर्सी पर 32 इंच के अतिरिक्त लोगो की भी अनुमति दे दी गई है। खेल के नए नियमों के तहत आईसीसी ने कोरोना महामारी के चलते ‘अंतरराष्ट्रीय यात्रा में लॉजिस्टिक की चुनौतियों’ का हवाला देते हुए द्विपक्षीय सीरीज में स्थानीय अंपायर्स को भी मंजूरी दे दी। यह करीब दो दशक बाद होगा कि घरेलू अंपायर मैच में रहेंगे। मतलब भारत के शमसुद्दीन, अनिल चौधरी और नितिन मेनन इंग्लैंड के खिलाफ अगले साल घरेलू सीरीज में अंपायरिंग करते नजर आएंगे, जबकि जवागल श्रीनाथ मैच रेफरी होंगे। स्थानीय अंपायर्स की अनुभवहीनता को देखते हुए दोनों टीमों को हर पारी में एक-एक अतिरिक्त डीआरएस भी मिलेगा।