आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेलने वाले उनादकट ने कहा कि 2010 में भारत की तरफ से डेब्यू करने के बाद वह एक गेंदबाज के रूप में परिपक्व हुए हैं। उन्होंने कहा, 'इससे भी बढ़कर मैंने उनमें कभी हार नहीं मानने का जज्बा देखा और उसे आत्मसात किया। जब मैं युवा था तो कुछ लोगों ने मुझे गलतियां करने वाला, एक छोटे शहर से आकर बड़े सपने देखने वाला लड़का करार दिया।'
उनादकट ने कहा, 'धीरे धीरे उनकी धारणा बदल गई। इस कारण मैं भी बदल गया। मैं परिपक्व हो गया। उतार, चढ़ाव, अत्याधिक खुशी, अत्याधिक निराशा। ओह। पता नहीं मैं इस खेल के बिना क्या होता।' उन्होंने कहा, 'इस खेल ने मुझे बहुत कुछ दिया है और एक पल के लिए भी मुझे इस पर पछतावा नहीं है कि मुझे क्यों नहीं चुना गया या मेरा समय कब आएगा या मैंने क्या गलत किया। मुझे पूर्व में मौके मिले और मुझे अब भी मौके मिलेंगे। जब मुझे इन अवसरों को मिलना होगा तो वे मुझे मिलेंगे।' उनादकट ने भारत की तरफ से एक टेस्ट, सात वन-डे और 10 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। उन्होंने राष्ट्रीय टीम की तरफ से अपना आखिरी मैच 2018 में खेला था।