भारत के लिए दो टेस्ट मैच खेलने वाले शॉ ने कहा कि ‘ मुझे इसे सबक के तौर पर लेना होगा और उम्मीद है कि यह हमारी खेल बिरादरी में दूसरों को प्रेरित करेगा। हम खिलाड़ियों को बीमार होने पर किसी भी दवा को लेने में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है, भले ही दवा काउंटर पर उपलब्ध हो और हमें हमेशा इसकी जरूरत हो तो भी प्रोटोकॉल का पालन करें।’
युवा सलामी बल्लेबाज ने कहा, ‘क्रिकेट मेरी जिंदगी है और भारत और मुंबई के लिए खेलने से बड़ा कोई सम्मान नहीं है और मैं इससे अधिक मजबूत बनूंगा।’ शॉ ने बीसीसीआई के डोपिंग रोधी परीक्षण कार्यक्रम के तहत 22 फरवरी 2019 को इंदौर में सैयद मुश्ताक अली ट्राफी के दौरान मूत्र का नमूना उपलब्ध कराया था। परीक्षण के बाद उनके नमूने में ‘टरबुटैलाइन’ पाया गया।
बीसीसीआई विज्ञप्ति में कहा गया है कि ‘टरबुटैलाइन वाडा की प्रतिबंधित पदार्थों की सूची में है और इसे प्रतियोगिता के दौरान या इससे इतर नहीं लिया जा सकता है।' उन्होंने कहा कि, ‘ऑस्ट्रेलिया दौरे पर मेरे पैर में चोट लगी थी और मैं प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी को लेकर बेकरार था। मैदान में उतरने की जल्दबाजी में मैंने काउंटर से कफ सिरप पर एक बुनियादी दवा खरीदने में सावधानी बरतने के प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया।’