आशीष नेहरा भारत के लिए अपने करीब 18 बरस के क्रिकेट करियर पर उतार चढ़ावों से विचलित किए हमेशा मौकों को भुनाने के लिए तैयार रहे। 39 वर्षीय नेहरा कहते हैं आंकड़ों और तुलना में कभी उनका यकीन नहीं रहा। नेहरा ने सभी तरह क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद अपने दिल की बात खोलकर कही। हर सवाल का शांत भाव से जवाब ही नहीं दिया बल्कि अपने करियर से बेहद संतुष्ट नजर आए।
शीर्ष पर रहते ही क्रिकेट को अलविदा कह देना चाहिए
आशीष नेहरा
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नेहरा ने कहा, ‘मेरा हमेशा से यही मानना रहा कि क्रिकेटर को शीर्ष पर रहते ही क्रिकेट को अलविदा कह देना चाहिए न कि तब जब लोग यह कहने कि कब रिटायर हो रहे हो। मैंने जब रिटायर होने का मन बना लिया तो मैंने विराट को इस बाबत बताया तो उन्होंने मुझसे कहा ,क्या वाकई आपने फैसला ले लिया है। फिर उन्होंने रवि शास्त्री को भी बता दिया। क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला मेरा था इस बाबत चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन ने मुझसे कुछ नहीं कहा था। कम से कम मुझे तो मालूम नहीं है। विराट और कोच रवि शास्त्री भी टीम प्रबंधन में हैं यदि ऐसा कुछ होता तो इस बाबत जरूर कुछ कहते लेकिन ऐसा कुछ था ही नहीं। जब दिल्ली में मेरे घरेलू मैदान के लिए 15 खिलाड़ियों में शामिल किया गया तो तो तब भी कई लोगों को मेरे दिल्ली में बुधवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी-20 में भारत के लिए खेलने को लेकर संदेह था। फिर भी मुझे मालूम था कि मैं इसमें खेलूंगा। ’
सबसे यादगार प्रदर्शन वही जब टीम को उससे जीत मिले
आशीष नेहरा
नेहरा ने आगे कहा, ‘मैच में आपके लिए वही सबसे यादगार प्रदर्शन वही है जब टीम को उससे जीत मिले। मसलन इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में मेरे छह विकेट से भारत को जीत मिली तो यह वाकई यादगार प्रदर्शन रहा। श्रीलंका के खिलाफ मैंने इंडियन ऑयल कप में छह विकेट लिए लेकिन टीम हार गई और दिल के भीतर से आवाज आई सब बेकार। मेरे करियर में ऐसा भी दौर आए कि जब दो बरस यहां तक चार बरस तक टीम इंडिया से बाहर रहा और आलोचकों ने मुझे खारिज कर दिया। मैं इसके बावजूद भारतीय टीम में इसलिए वापसी कर पाया क्योंकि मैंने खुद को हमेशा मौके को लपकने के लिए तैयार रखा। मेरी टीम के हर नौजवान गेंदबाज और बल्लेबाज के लिए यही नसीहत है कि खुद को हमेशा फिट रखो और जब भी मौका मिले उसे दोनों हाथों लपक कर अपनी जगह पक्की करो।’
अाज का दौर विराट कोहली जो रूट का
विराट कोहली
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नेहरा कहते हैं, ‘चाहे सचिन तेंडुलकर के साथ ब्रायन लारा हो या जैक कैलिस उनका दौर अलग था। अब विराट कोहली, जो रूट का दौर है। इनमें किसीके भी आंकड़े अपने से अलग दौर के क्रिकेटर से बेहतर हो सकते हैं। लेकिन क्रिकेटर कितना महान है आंकड़े हर समय उसकी सही तस्वीर पेश नहीं करते। ऐसे में यह कहना कि कौन बेहतर है यह बहुत मुश्किल है। हर टीम बदलाव के दौर गुजरती है और हर टीम और खिलाड़ी के लिए हालात अलग होते हैं। हां, एक बात जरूर कहूंगा कि विराट, रोहित शर्मा जैसे बल्लेबाजों और गेंदबाजों में जसप्रीत बुमराह,भुवनेश्वर कुमार के साथ यंग यजुवेंद्र चहल , कुलदीप यादव के साथ वन डे ही टेस्ट क्रिकेट में भारतीय क्रिकेट सुरक्षित हाथों में है।’
बतौर कप्तान दादा,वीरू,धोनी और विराट अलग हैं
सौरव गांगुली
नेहरा ने कहा, ‘ मैं चाहे दादा (सौरभ ), वीरू (सहवाग), धोनी और विराट सहित अलग-अलग कप्तानों की कप्तानी में खेला। हर कप्तान की सोच अलग थी। दादा बहुत आक्रामक कप्तान रहे और वीरू ने बहुत कम कप्तानी की लेकिन उन्होंने अपने हर खिलाड़ी को उसकी सोच के मुताबिक खेलने की आजादी देने वाले सकारात्मक सोच वाले कप्तान रहे। धोनी को बहुत चतुर और हालात को पढ़ने में माहिर कप्तान मानता हूं। विराट कोहली मिजाज से आक्रामक हैं और टीम के हर खिलाड़ी को उसी अंदाज में मैदान पर बेहतरीन करने को प्रेरित कराते है। जहां तक बुमराह और भुवी की बात है तो मैं समझता हूं कि वे इस समय मुझसे बेहतर गेंदबाज हैं। ऐसे मेरे लिए खेलना जारी में इन दोनों युवा गेदबाजों सरीखे पेसरों का रास्ता रोकना मुझे वाजिब नहीं लगा।’
हमारा मुल्क स्टारों को प्यार करने वाला मुल्क
विरेंद्र सहवाग
नेहरा ने भारतीय खेल प्रशंसकों के बारे में कहा ‘हमारा मुल्क स्टारों को प्यार करने वाला मुल्क है न कि खेल प्रेमी मुल्क है। हम मैदान पर स्टारों को देखने आते हैं। मिसाल के तौर पर इशांत शर्मा दिल्ली के रणजी भारतीय टीम में नहीं क्योंकि वहां तो केवल 15 भारतीय टीम में रहेंगे। इसीलिए अब कोई न तो इशांत की चर्चा करेगा और न ही फिलहाल उनकी तरह टीम से बाहर रविचंद्रन अश्विन की और न ही रवींद्र जडेजा की। मैंने अपना आखिरी टेस्ट तब खेला जब 25-25 बरस का था लेकिन इसके बावजूद मैं भारत के लिए 18 बरस से ज्यादा खेला। आखिर में नेहरा ने कहा, ‘मैंने और वीरू ने अपनी क्रिकेट की यात्रा जूनियर स्तर पर अपनी यात्रा साथ तय की । स्कूटर पर मैदान आते समय वह चलाते थे और जाते समय मैं। हम दोनों की दोस्ती आज भी कायम है।’