ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 22 फरवरी से चेन्नई में शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज के लिए ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने अपनी कमर कस ली है। 99 टेस्ट मैच खेल चुके भज्जी इस टेस्ट सीरीज की शुरुआत का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी चिंता अंतिम एकादश में जगह बनाने की है।
इंग्लैंड के खिलाफ पिछले साल नवंबर में आखिरी टेस्ट मैच खेलने हरभजन का प्रदर्शन पिछले कुछ महीने बहुत अच्छा नहीं रहा है। रणजी ट्रॉफी में भी हरभजन पंजाब के लिए खेलते हुए प्रभावशाली प्रदर्शन नहीं कर पाए थे। राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनके शानदार रिकॉर्ड के भरोसे उन्हें टीम में शामिल करने का जोखिम उठाया।
रणजी सत्र में हरभजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन सौराष्ट्र के खिलाफ 60 रन पर चार विकेट रहा था। रणजी चैंपियन मुंबई के खिलाफ शेष भारत के लिए खेलते हुए हरभजन ने 64 रन पर तीन विकेट और 38 रन पर दो विकेट लिए थे। 99 टेस्टों में 32.27 के औसत से 408 विकेट लेने वाले 32 वर्षीय हरभजन ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 16 टेस्टों में 29.35 के औसत से 90 विकेट लिए हैं जिसमें पारी में पांच विकेट सात बार और मैच में 10 विकेट तीन बार हैं।
हरभजन जुलाई 2011 में नाटिंघम में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट खेलने के बाद नवंबर 2012 में मुंबई में इंग्लैंड के खिलाफ अगला टेस्ट खेल पाए। हरभजन की सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धा आर अश्विन के साथ है। अश्विन का प्रदर्शन भी इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में बहुत अच्छा नहीं रहा था और वह चार टेस्ट मैच में सिर्फ 14 विकेट ही चटका पाए थे, लेकिन चेन्नई अश्विन का घरेलू मैदान है और ऐसे में उनका टीम से बाहर रहना मुश्किल दिखाई पड़ता है।
वहीं, भज्जी के लिए चेन्नई काफी भाग्यशाली रहा है और उन्होंने यहां छह टेस्ट मैचों में 39 विकेट लिए हैं। उनका इस मैदान पर एक पारी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 84 रन पर आठ विकेट और मैच में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 217 रन पर 15 विकेट है। हालांकि यह भी देखना होगा कि कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पहले टेस्ट मैच में किस रणनीति से उतरते हैं। धोनी दो पेस और दो स्पिनर के साथ उतरेंगे या एक पेसर और तीन स्पिनर के साथ ऑस्ट्रेलिया का सामना करेंगे। टीम में शामिल तीसरे स्पिनर प्रज्ञान ओझा इस टेस्ट में खेलना पक्का है क्योंकि उनका प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा है।