पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह का मानना है कि भारत अब भविष्य की ओर देख रहा है और यही कारण है कि उसने रविचंद्रन अश्विन की जगह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पर्थ टेस्ट में वाशिंगटन सुंदर को मौका दिया था। भारत ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के पहले मुकाबले में अनुभवी ऑफ स्पिनर अश्विन को प्लेइंग-11 में शामिल नहीं किया था और सुंदर को मौका मिला था।
सुंदर ने पहले टेस्ट मैच में दोनों पारियां मिलाकर 33 रन बनाए थे और कुल दो विकेट झटके थे। सुंदर ने हाल ही में तीन साल बाद टेस्ट क्रिकेट में वापसी की थी और न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 11 विकेट झटके थे। हरभजन का कहना है कि अश्विन की उपलब्धियों को कोई छीन नहीं सकता है, लेकिन सुंदर का टीम में शामिल होना यह दर्शाता है कि भारत उन्हें भविष्य के लिए तैयार कर रहा है।
अश्विन 536 विकेट लेकर भारत के लिए अनिल कुंबले के 619 टेस्ट विकेटों के बाद दूसरे स्थान पर हैं। लेकिन उन्हें अगले 84 विकेट लेने में समय लग सकता है क्योंकि युवा वाशिंगटन गौतम गंभीर के कार्यकाल में भारत के पहली पसंद के ऑफ-ब्रेक गेंदबाज बन गए हैं।
जब हरभजन से पूछा गया कि क्या वह अश्विन के तमिलनाडु के युवा साथी को मुख्य स्पिनर की भूमिका निभाते हुए देखते हैं तो उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि यह टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं की दीर्घकालिक योजना है। रविचंद्रन अश्विन ने अपने करियर में भारत के लिए खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया है।
अश्विन की उम्र को निश्चित रूप से ध्यान में रखा जा रहा है और यही एक कारक है। हरभजन ने कहा, अब अश्विन उम्र के उस मुकाम पर है। उनकी उम्र 38 साल है इसलिए उन्होंने वाशिंगटन सुंदर को अपने साथ रखा है क्योंकि जब भी अश्विन संन्यास लेंगे तो वह उनके साथ होगा। टीम को लगता है कि उन्हें वाशिंगटन को तैयार करना है इसलिए मुझे लगता है कि वे उसी राह पर काम कर रहे हैं।