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Sanjay Manjrekar: कभी कहलाते थे अगले गावस्कर, द्रविड़-गांगुली ने खत्म किया करियर!

Sun, 12 Jul 2020 01:42 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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संजय मांजरेकर - फोटो : ट्विटर
आज संजय मांजरेकर का जन्मदिन है। क्रिकेट उन्हें विरासत में मिला। पिता विजय मांजरेकर उस दौर के बल्लेबाज थे, जब भारतीय क्रिकेट अपने पैर जमाने में लगा था। सीनियर मांजरेकर का जब निधन हुआ तब संजय महज 18 साल के थे। उस वक्त तक उनका रणजी डेब्यू भी नहीं हुआ था। हालांकि पिता को भरोसा था कि बेटा एक दिन टीम इंडिया के लिए खेलेगा।
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संजय मांजरेकर - फोटो : ANI
12 जुलाई 1965 को जन्में संजय मांजरेकर को कभी सुनील गावस्कर का उत्तराधिकारी माना जाता था, लेकिन वह अपने करियर में वह बुलंदी हासिल नहीं कर पाए, जितना उनसे उम्मीद की गई थी। खुद संजय मांजरेकर ने अपनी आत्मकथा में खुलासा किया था कि राहुल द्रविड़ औऱ सौरव गांगुली की वजह से उनका करियर जल्दी खत्म हो गया।
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संजय मांजरेकर - फोटो : ट्विटर
संन्यास लेने के बाद बतौर कमेंटेटर अपनी अलग पहचान बनाने वाले संजय मांजरेकर ने 2018 में लॉन्च की अपनी आत्मकथा 'इंपर्फेंक्ट' में लिखा कि जब उन्होंने खेल को अलविदा कहा तब वह टीम के महत्वपूर्ण बल्लेबाज थे और आउट ऑफ फॉर्म तो बिलकुल नहीं थे, लेकिन सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ के खेल को देखकर समझ चुके थे कि अब उनका 'समय पूरा' हो चुका है।

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सौरव गांगुली-राहुल द्रविड़ - फोटो : सोशल मीडिया
मांजरेकर ने लिखा कि 1996 इंग्लैंड दौरे पर द्रविड़ से तो लोगों को उम्मीद थी कि वे बढ़िया प्रदर्शन करेंगे, लेकिन सौरव गांगुली सबके लिए सरप्राइज रहे। संजय ने आगे कहा कि द्रविड़ तो लगता था कि टीम इंडिया के लिए ही बने हैं, लेकिन जब मैंने उन्हें खेलते देखा और जिस तरह से उन्होंने बैटिंग की, तभी मुझे अंदाजा हो गया था कि अब मेरा 'समय पूरा' हो गया है।
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अन्य साथियों के साथ सचिन तेंदुलकर और संजय मांजरेकर - फोटो : सोशल मीडिया
मांजरेकर जब तक इंटरनेशनल क्रिकेट खेले उनकी पहचान एक तकनीकी रूप से सक्षम खिलाड़ी के तौर पर रही। खासतौर पर उनका रिकॉर्ड विदेशी पिचों पर शानदार रहा। उनको उनकी तकनीक के लिए साथी खिलाड़ी उन्हें कई बार मि. परफेक्ट कहा करते थे, लेकिन सचिन तो उन्हें मि. डिफरेंट नाम दिया।
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इसके अलावा, मीठे शब्दों में सचिन की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा था कि सचिन जब अपने करियर के अंतिम पड़ाव से गुजर रहे थे, तब कई बार उनकी वजह से टीम में गलत चीजें घट रही थीं। यह ऐसा समय था जब सचिन बेहद खराब फॉर्म से गुजर रहे थे, लेकिन महज एक प्रतिष्ठित खिलाड़ी होने की वजह से कोई भी उन्हें प्लेइंग-11 से बाहर बिठाने की हिम्मत नहीं कर रहा था। खराब फॉर्म में रहते हुए लगातार टीम में बने रहना दूसरे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के साथ मजाक है।
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सचिन तेंदुलकर और संजय मांजरेकर - फोटो : ट्विटर
संजय मांजरेकर ने कहा था, 'जब कभी मेरे जहन में सचिन की रिटायरमेंट को लेकर ख्याल आता था, तो मैं हमेशा सोचता था कि सचिन आगे चलकर कोचिंग, बिजनेस या सोशल एक्टिविटी के जरिए किसी न किसी तरह से क्रिकेट से जुड़े रहेंगे। मगर विश्वकप विजेता खिलाड़ी ने क्रिकेट से जुड़ने की बजाए राज्यसभा का सदस्या बनना ज्यादा बेहतर विकल्प समझा।'
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