जिनकी कप्तानी में भारत को पहली जीत मिली, जिन्होंने अपने पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे पर मैच की दोनों पारियों में शतक जमाया। ये उपलब्धियां भारत के पूर्व कप्तान विजय हजारे के नाम दर्ज है। विजय सैमुअल हजारे का जन्म 11 मार्च, 1915 को महाराष्ट्र के सांगली में मराठी भाषी क्रिश्चियन परिवार में हुआ था।
बेहद संजीदा स्वभाव वाले विजय हजारे भारत के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में हैं जिन्होंने अपने खेल के साथ अपनी कप्तानी का भी लोहा मनवाया। भारत को टेस्ट दर्जा मिलने के करीब 20 साल बाद 25वें टेस्ट में जीत मिली थी। हजारे की कप्तानी में खेलते हुए 1952 में टीम इंडिया ने चेन्नई (मद्रास) में इंग्लैंड के खिलाफ एक पारी और आठ रन से जीत दर्ज की थी।
कंगारुओं की निकाली थी हवा
ऑस्ट्रेलिया की जिन पिचों पर टीम इंडिया के बल्लेबाज आज भी बेबस दिखते हैं, वहीं 1948 में विजय हजारे ने दोनों पारियों में शतक जमाकर कंगारुओं की हवा निकाल दी थी। एडिलेड टेस्ट में हजारे ने पहली पारी में 116 और दूसरी में 145 रनों की पारी खेली थी। हालांकि भारत यह मैच एक पारी और 16 रनों से हार गया था, लेकिन हजारे की बल्लेबाजी देखकर विपक्षी कप्तान सर डॉन ब्रेडमैन भी अचंभित रह गए थे।
घरेलू मैचों के पहले शहंशाह
विजय हजारे ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों मैचों में अंत तक शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 30 टेस्ट मैचों की 52 पारियों में 6 बार नाबाद रहते हुए 47.65 की औसत से कुल 2,192 रन बनाए। इसमें नाबाद 164 रन उनका सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर रहा है। हजारे ने टेस्ट मैचों में सात शतक एवं नौ अर्धशतक लगाए हैं।
इसके अलावा हजारे ने 238 प्रथम श्रेणी मैचों में 58.38 की औसत से कुल 18,740 रन बनाए हैं। इसमें नाबाद 316 रन उनका सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर रहा है। हजारे ने प्रथम श्रेणी मैचों में 60 शतक एवं 73 अर्धशतक लगाए हैं। हजारे ने घरेलू मैचों में पहला तिहरा शतक लगाया था।
गेंदबाजी में भी हजारे का प्रदर्शन लाजवाब था। उन्होंने अपने टेस्ट करियर में 61.00 की औसत से कुल 20 विकेट भी चटकाए थे। साथ ही प्रथम श्रेणी मैचों में 595 विकेट झटके थे।
भारतीय क्रिकेट के अनमोल रत्न विजय हजारे ने 18 दिसंबर 2004 में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। इस दिग्गज खिलाड़ी के सम्मान में भारत में घरेलू स्तर पर हर साल विजय हजारे टूर्नामेंट होता है।