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'लिविंग लीजेंड' कपिल देव को दें जन्मदिन की बधाई

Sun, 06 Jan 2013 01:45 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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मजबूत कद-काठी का एक ऐसा ऑलराउंडर खिलाड़ी, जिसने भारतीय क्रिकेट को एक नई दिशा दी। जब भी भारत में विश्वकप की चर्चा होती है, तब इस महान ऑलराउंडर का नाम सबकी जुबां पर होता है। 6 जनवरी 1959 को चंढीगढ़ में जन्में कपिल रामलाल निखंज देव को क्रिकेट प्रेमी कपिल देव के नाम से ही जानते हैं।
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हरियाणा के कपिल ने अपने ऑलराउंड खेल से ना सिर्फ सबका दिल जीता, बल्कि अपने करियर के आखिर तक आते-आते सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए थे। उन्होंने अपनी आखिरी टेस्ट सीरीज में 434 विकेट का आंकड़ा छुआ और न्यूजीलैंड के रिचर्ड हैडली को पीछे छोड़ दिया। इसी तरह एकदिवसीय क्रिकेट में भी कपिल ने जोएल गार्नर का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 253 विकेट लिए जो 1994 तक बरकरार रहा, लेकिन बाद में इसे वसीम अकरम ने तोड़ दिया।

चिरप्रतिद्वंदी पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट करियर की शुरुआत करने वाले इस महान क्रिकेटर का अंतरराष्ट्रीय पदार्पण शानदार नहीं रहा था। वर्ष 1978 में पाकिस्तान के खिलाफ अपने पहले तीन टेस्ट मैचों में कपिल देव के हाथ सिर्फ सात विकेट ही लगे। लेकिन जल्द की कपिल देव ने दिखा दिया कि उनमें कितना दमखम है। उन्होंने वर्ष 1979 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 22 विकेट लिए और इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज में 32 विकेट लिए। सिर्फ 21 वर्ष और 27 दिन की आयु में कपिल देव 1000 रन और 100 टेस्ट विकेट लेने वाले दुनिया के सबसे युवा खिलाड़ी बने। उन्होंने 2000 रन और 200 विकेट का डबल भी सबसे कम उम्र में पूरा किया।
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लीजैंड है 175 रनों की पारी
भारतीय क्रिकेट के लिविंग लीजैंड माने जाने वाले कपिल देव ने 1983 विश्व कप में जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे मैच में 175 रनों की धमाकेदार पारी खेली थी। कपिल के बल्ले से निकली यह पारी लंबे समय तक वनडे क्रिकेट में रिकॉर्ड बनी रही। वर्ष 1990 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में भारत को फॉलोऑन से बचने के लिए 24 रनों की आवश्यकता थी। कपिल देव के साथ नरेंद्र हिरवानी पिच पर मौजूद थे। एडी हेमिंग्स के ओवर की चार गेंदें बाकी थी। कपिल देव के पास इसका जवाब था। उन्होंने चार गेंद पर चार छक्के लगाए और जवाब दे दिया। वर्ष 1986 में कपिल देव की कप्तानी में ही भारत ने लॉर्ड्स में पहली टेस्ट जीत दर्ज की थी।

सेना में लेफिटनेंट कर्नल हैं कपिल देव
कपिल के भारतीय क्रिकेट में योगदान की फेहरिस्त काफी लंबी है। इसी कारण उन्हे 2002 में विस्डन इंडियन क्रिकेटर ऑफ द सेंचुरी के पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। साथ ही उन्हें 1989-80 में अर्जुन पुरस्कार, 1982 में पद्ममश्री, 1983 में क्रिकेटर ऑफ द ईयर, 1991 में पद्मविभूषण जैसे पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा कपिल के योगदान को देखते हुए उन्हें 24 सितंबर 2008 को भारतीय सेना में लेफिटनेंट कर्नल का दर्जा दिया गया।

कपिल ने दिया आईसीएल का कांसेप्ट
कपिल संन्यास के बाद भी क्रिकेट के लिए अपनी उपयोगिता साबित करते रहे। उन्होंने 1999 में भारतीय टीम के कोच का पद संभाला और सन 2000 तक टीम से जुड़े रहे। इसके अलावा कपिल ने बीसीसीआई से अलग इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) टी20 टूर्नामेंट की शुरुआत की। हालांकि किन्हीं कारणों से आईसीएल को बंद कर दिया गया। लेकिन बीसीसीआई ने इस फॉर्मूले की तर्ज पर आईपीएल शुरू किया जो विश्व प्रसिद्घ टूर्नामेंट है। खास बात यह है कि कपिल के इसी फॉर्मूले पर दुनिया के अलग-अलग देशों टी20 टूर्नामेंट का आयोजन कराया जाता है।
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