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गुल मोहम्मद: पाकिस्तान में पैदा हुआ वह क्रिकेटर जिसने हिंदुस्तान की ओर से खेला मैच

Tue, 15 Oct 2019 10:46 AM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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टीम के साथ गुल मोहम्मद - फोटो : ट्विटर

दुनिया के सबसे पसंदीदा खेल की बात की जाए तो फुटबॉल के बाद सभी के जेहन में क्रिकेट का नाम ही तैरेगा। इस लोकप्रिय का खेल का इतिहास जितना पुराना है, उतनी ही मजेदार इसके विकसित होने की कहानी है। विश्व क्रिकेट में ऐसे कई खिलाड़ी हुए, जिन्होंने एक नहीं बल्कि दो-दो देशों की ओर से इंटरनेशनल क्रिकेट खेली। ऐसे ही एक खिलाड़ी थे गुल मोहम्मद, जिनका आज जन्मदिन है।

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गुल मोहम्मद - फोटो : ट्विटर
15 अक्टूबर 1921 को लाहौर में जन्में गुल मोहम्मद अगर आज जिंदा होते तो अपनी 98वीं सालगिरह मना रहे होते। पांच फीट पांच इंच लंबे गुल एक बेहतरीन ऑलराउंडर थे। बाएं हाथ से बल्लेबाजी के साथ-साथ वे मध्यम तेज गेंदबाज किया करते थे। उस दौर में जब फिल्डर्स को उतना चुस्त नहीं माना जाता था, तब गुल मोहम्मद की फुर्तीले अंदाज की चर्चाएं हुआ करती थी, कवर्स में फिल्डिंग करने वाला यह खिलाड़ी दोनों हाथों से गेंद थ्रों करने में माहिर था।
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गुल मोहम्मद - फोटो : ट्विटर
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि गुल मोहम्मद से पहले भी दो पाकिस्तानी खिलाड़ी भारत की ओर से टेस्ट मैच खेल चुके थे। 17 साल की उम्र में उत्तर भारत की ओर से रणजी ट्रॉफी में गुल ने अपनी शुरुआत की फिर उत्तर भारत त्रिकोणीय टूर्नामेंट में गुल ने हिंदुओं के खिलाफ मुस्लिम्स के लिए 95 रन की शानदार पारी खेली थी। दो साल बाद उन्होंने शेष भारत के लिए वेस्टर्न इंडिया के खिलाफ शतक ठोका।

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दूसरा विश्व युद्ध
इस बेहतरीन खेल के बूते जल्द ही उन्हें 1946 में भारतीय टीम में एंट्री मिल गई, लेकिन लॉर्ड्स में खेले अपने पहले टेस्ट में वे सफल नहीं रहे, लेकिन इसके बाद एक बार फिर उन्होंने रणजी ट्रॉफी में बेहतरीन प्रदर्शन कर 319 रन की शानदार पारी खेली और चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। द्वितीय विश्व युद्ध के चलते सभी क्रिकेटर्स की तरह उनके करियर में भी विराम लग गया। इस बीच हिंदुस्तान-पाकिस्तान का बंटवारा हो गया।
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अपने साथियों के साथ गुल मोहम्मद - फोटो : ट्विटर
गुल मोहम्मद भी पाकिस्तान में बस गए और फिर अपने नए देश की सेवा की। क्रिकेट के अलावा कबड्डी, एथलेटिक्स, तैराकी में भी निपुण यह खिलाड़ी पढ़ाई में भी काफी तेज था। गुलाम भारत के इस्लामिया कॉलेज ऑफ लाहौर से अपनी शिक्षा लेने वाले गुल ने क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अंपायरिंग और कोचिंग में भी हाथ आजमाए। उनके बेटे फिरदौस गुल ने भी क्रिकेटर बनने की इच्छा जताई, लेकिन सिर्फ प्रथम श्रेणी क्रिकेट तक ही सीमित रह गए। पाकिस्तान की नुमांइदगी का मौका नहीं मिल पाया।
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विजय हजारे - फोटो : ट्विटर
8 मई 1992 कैंसर की वजह से गुजर जाने वाले गुल मोहम्मद की भारतीय दिग्गज क्रिकेटर विजय हजारे के साथ साझेदारी आज भी याद की जाती है। आजादी से ठीक पांच माह पहले 1946-47 में रणजी ट्रॉफी के फाइनल में होलकर्स के खिलाफ दोनों के बीच 577 रन की ऐतिहासिक पार्टनरशिप हुई थी। दोनों ने फ्रैंक वॉरेल और क्लाइड वॉलकेट के 574 रन के पिछले रिकॉर्ड को ध्वस्त किया था। गुल ने जहां इस मैच में 319 रन बनाए तो हजारे ने 288 रन का योगदान दिया था। बाद में साझेदारी के इस रिकॉर्ड को श्रीलंकाई दिग्गज बल्लेबाजों की जोड़ी कुमार संगाकारा और महेला जयवर्धन ने (624) ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2006 में तोड़ा था।
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