वनडे विश्व कप 2023 का आयोजन इसी साल भारत में होना है। टीम इंडिया इस टूर्नामेंट की तैयारी में जुटी हुई है। आखिरी बार वनडे विश्व कप की मेजबानी 2011 में भारत को मिली थी और इसी साल भारतीय टीम ने आखिरी बार कोई विश्व कप जीता था। भारत ने फाइनल में श्रीलंका को मात दी थी और दूसरी बार वनडे विश्व कप अपने नाम किया था। भारत को यह ट्रॉफी जीते 12 साल हो चुके हैं, लेकिन अभी भी इस विश्व कप से जुड़ी कई कहानियां चर्चा में रहती हैं। ऐसी ही एक कहानी गौतम गंभीर ने सुनाई है।
2011 विश्व कप के फाइनल में श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 274 रन बनाए थे। श्रीलंका के लिए महेला जयवर्धने ने शतकीय पारी खेली थी। 275 रन का पीछा करते हुए भारत के सलामी बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर जल्दी आउट हो गए थे। इसके बाद गौतम गंभीर ने विराट कोहली के साथ मिलकर भारतीय पारी संभाली थी। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 83 रन जोड़कर मैच में भारत की वापसी कराई थी। इसके बाद गंभीर ने चौथे विकेट के लिए धोनी के साथ 109 रन की साझेदारी कर मैच पलट दिया था। हालांकि, गंभीर 97 रन बनाकर आउट हो गए थे। इसके बाद युवराज ने धोनी के साथ मिलकर मैच खत्म किया था।
कप्तान धोनी ने छक्के के साथ मैच खत्म किया था और प्लेयर ऑफ द मैच भी बने थे। 97 रन बनाने के बावजूद गौतम गंभीर प्लेयर ऑफ द मैच नहीं बने थे और उनके फैंस को इस बात का काफी मलाल था। इस वजह से धोनी और गंभीर के फैंस कई बार बहस भी करते हैं, लेकिन गंभीर ने इस मैच से जुड़ी ऐसी कहानी सुनाई है, जो दोनों खिलाड़ियों की दोस्ती का उदाहरण देती हैं।
भारत और श्रीलंका के बीच मैच के दौरान गंभीर ने बताया "महेंद्र सिंह धोनी मेरा बहुत समर्थन कर रहे थे। वह चाहते थे कि मैं अपना शतक पूरा करूं। उन्होंने ओवरों के बीच में मुझे कहा था कि आप अपना शतक पूरा कीजिए। अपना समय लीजिए और जल्दीबाजी की कोई जरूरत नहीं है। अगर जरूरत पड़ी तो मैं तेजी से रन बना सकता हूं।"
हालांकि, गंभीर अपना शतक पूरा नहीं कर पाए थे। 97 रन के स्कोर पर उन्होंने आगे बढ़कर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की और क्लीन बोल्ड हो गए। गंभीर शतक से जरूर चूक गए थे, लेकिन आउट होने से पहले वह भारत को जीत की दहलीज पर पहुंचा चुके थे। आगे का काम आसान था और धोनी ने युवराज के साथ मिलकर इसे और आसानी से पूरा किया।