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महज सात मिनट में टीम इंडिया के कोच बने थे गैरी कर्स्टन, यूं कटा था ग्रेग चैपल का नाम

Mon, 15 Jun 2020 05:09 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : सोशल मीडिया

टीम इंडिया को अपनी कोचिंग में साल 2011 का विश्व कप दिलाने वाले गैरी कर्स्टन की गिनती भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कोच में होती है। 2009 में गुरु गैरी के कार्यकाल में ही भारतीय टीम पहली बार टेस्ट में नंबर एक बनी थी, लेकिन क्या आपको पता है कि इस अहम पद के इस पूर्व दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज ने आवेदन ही नहीं किया था।

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जी हां, ये सच है। कर्स्टन ने ‘क्रिकेट कलेक्टिव’ पॉडकास्ट में 2007 में घटी उन घटनाओं का जिक्र किया। बताया कि कोचिंग में उनकी दिलचस्पी नहीं थी और उन्होंने भारतीय टीम के कोच पद के लिए आवेदन भी नहीं किया था, लेकिन गैरी कर्स्टन को 2007 में केवल सात मिनट में यह अहम पद मिला था, जिसमें पूर्व भारतीय दिग्गज सुनील गावसकर की भूमिका भी अहम रही थी।
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- फोटो : ट्विटर

कर्स्टन ने बताया, ‘मुझे सुनील गावसकर का ई-मेल मिला था कि क्या मैं भारतीय टीम का कोच बनना चाहूंगा।’ पहले मुझे लगा कि यह मजाक है इसलिए मैंने कोई जवाब नहीं दिया। फिर गावस्कर का एक और मेल आया कि क्या आप आप इंटरव्यू के लिए आना चाहेंगे और जब वह साक्षात्कार के लिए भारत पहुंचे तो उनका सामना तब के भारतीय कप्तान अनिल कुंबले से हुआ। उन्होंने कहा, ‘तुम यहां क्या कर रहे हो।’ कर्स्टन ने  जवाब दिया कि मैं आपका कोच बनने आया हूं।’ फिर दोनों हंस पड़े।

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- फोटो : ट्विटर

कर्स्टन ने कहा, ‘मैं बीसीसीआई के अधिकारियों के सामने था और माहौल काफी गंभीर था। कोचिंग का कोई अनुभव नहीं था। समिति में मौजूदा कोच रवि शास्त्री भी शामिल थे। उन्होंने पूछा था, गैरी हमें यह बताओ कि भारतीय टीम के हराने के लिए तुम्हारी दक्षिण अफ्रीका टीम में क्या रणनीति बनाई जाती थी। माहौल हल्का करने के लिए यह एक अच्छा सवाल था, क्योंकि मैं इसका जवाब आसानी से दे सकता था।

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धोनी और कर्स्टन - फोटो : getty

गैरी कर्स्टन का इंटरव्यू सिर्फ सात मिनट चला था। सभी सदस्य उनसे प्रभावित हो चुके थे। तीन मिनट बाद ही बोर्ड के सचिव ने उनके पास अनुबंध पत्र खिसका दिया, जिस पर निर्वतमान कोच ग्रेग चैपल का नाम लिखा था और इस तरह कर्स्टन ने 2008 से लेकर 2011 तक भारतीय टीम का कोच पद संभाला।

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