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कभी डर के साये में जीते थे विराट कोहली, करियर की शुरुआत में ही सताने लगा था खौफ

Tue, 16 Oct 2018 08:12 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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अपनी बेहतरीन और बेखौफ बल्लेबाजी से दुनिया भर के गेंदबाजों की नींद उड़ाने वाले विराट कोहली अपने करियर के शुरू में वेस्टइंडीज के एक तेज गेंदबाज से बेहद खौफ खाने लग गए थे और उन्हें यहां तक लगने लग गया था कि उनका टेस्ट करियर शुरू में ही खत्म हो जाएगा।
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कोहली ने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत वेस्टइंडीज में की थी और तीन टेस्ट मैचों में वह केवल 76 रन बना पाए थे। अपनी पहली चार टेस्ट पारियों में से तीन में फिडेल एडवर्ड्स ने उन्हें पवेलियन की राह दिखायी थी।
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एक वरिष्ठ खेल पत्रकार ने अपनी किताब ‘क्रिकेट के अनसुने किस्से’ में कोहली की उस समय की मानसिकता का रोचक वर्णन किया है।

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किताब में लिखा गया है, ‘दो टेस्ट मैच की चार पारियों में यह तीसरा मौका था जब एडवर्ड्स ने उन्हें आउट किया था। विराट कोहली ने अपने करीबी लोगों के सामने माना था कि उन्हें एडवर्ड्स की गेंद को ‘पिक’ करने में दिक्कत हो रही है।‘
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भारतीय टीम की कमान संभालने के बाद अपने व्यवहार में बदलाव करने वाले कोहली अपने करियर के शुरू में बेहद शरारती थे। किताब में उनसे जुड़ा एक किस्सा दिया गया है कि किस तरह से उन्होंने दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में अपने नए मोबाइल के एक ‘एप’ की मदद से टीवी का ‘वॉल्यूम’ कम और ज्यादा करके वहां मौजूद लोगों और होटल स्टाफ को परेशानी में डाल दिया था।
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- फोटो : file photo
सचिन तेंदुलकर से जुड़े कई किस्सों का इस किताब में जिक्र है। एक बार वेस्टइंडीज दौरे में तेंदुलकर को ‘वाटर स्पोर्ट्स’ खेलने की इच्छा नहीं थी लेकिन जब उनकी पत्नी अंजलि जिद करने लगी तो उन्होंने गुस्से में उन्हें कुछ इस तरह से क्रिकेटियां धमकी दे डाली थी, ‘अब अगर उन्होंने एक भी बार वाटर स्पोर्ट्स के लिए जाने को कहा तो वो उन्हें एलेन डोनाल्ड के सामने बगैर पैड पहने बल्लेबाजी करने के लिए भेंज देंगे।’
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वीरेंद्र सहवाग ने एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जब अपना पहला दोहरा शतक पूरा किया तो वह अपने पसंदीदा गायक किशोर कुमार का गाना गुनगुना रहे थे तो सौरव गांगुली एक समय हरभजन सिंह के जूतों को अपने लिए भाग्यशाली मानने लग गए थे और कई मैचों में वह इस ऑफ स्पिनर के जूते पहनकर बल्लेबाजी के लिए उतरे थे।

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इस किताब के तमाम दिलचस्प किस्सों में 1983 विश्व कप के भी किस्से हैं। तब भारत और वेस्टइंडीज की टीमें फाइनल में पहुंची थी लेकिन खिताबी मुकाबले से पहले पूरी टीम कप्तान कपिल देव और मोहिंदर अमरनाथ से नाराज थी।
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पाकिस्तान के महान क्रिकेटर फजल महमूद के बचपन की एक कहानी दिलचस्प है। जो इस तरह शुरू होती है, ‘गुजरात में एक स्कूली बच्चे ने अपनी टीम को अपने बलबूते पर जीत दिलाई। अगले दिन उसका नाम अखबार की सुर्खियों में आया। उसकी तस्वीर भी छपी। इस कामयाबी के बाद भी अगले दिन स्कूल पहुंचने पर उसे लगा कि आज पूरे स्कूल के सामने उसकी पिटाई होगी।’
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