पहले मैच में शून्य पर आउट हुए थे रैना
रैना ने कहा, पहला मैच श्रीलंका के खिलाफ था। राहुल द्रविड़ हमारे कप्तान थे। धोनी भाई, मैं और इरफान पठान बैठे हुए थे। जब मैं शून्य पर आउट हुआ तो काफी निराश था। सोच रहा था कि पहला मौका मिला, लेकिन अब दूसरा मौका मिलेगा या नहीं मिलेगा। तो राहुल भाई आए और कहा- मैच था ये भाई। आउट ही हो गया। कल फिर ये मैच होगा। फील्डिंग में कुछ करके दिखाओ, गेंदबाजी में कुछ करके दिखाओ। उस समय राहुल भाई, सचिन पाजी, वीरेंद्र सहवाग ने इतना समर्थन किया एक मेरे जैसे युवा का, वो कहते थे जाओ बिंदास खेलो, हम आपके साथ खड़े हैं। तो ऐसा लगता था कि ये टीम नहीं हमारा परिवार है। राहुल भाई मेरे आदर्श हैं।
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'राहुल भाई से सीखा खेलने का जज्बा'
उन्होंने कहा, फिर 2005, 2006, 2007, 2008 वो डगर चलती रही। राहुल भाई ने बहुत समर्थन किया, वो काफी अनुशासित थे और टीम की दीवार थे। राहुल भाई एक अलग ही किस्म के इंसान हैं। मुझे 2005 में वनडे कैप भी उनसे मिली, 2010 में टेस्ट कैप भी उनसे मिली। उनके साथ बहुत साझेदारी की, बहुत मैच खेले। 2005-06 में उनका बेटा समित, तब बहुत छोटा था तो वो बहुत रो रहा था। राहुल भाई को अगले दिन जमैका में बल्लेबाजी करनी थी। तो वो पहले बेटे के साथ रात तीन बजे तक खेले और फिर उसे सुलाके फिर आराम किया। अगले दिन दोनों पारियों में उन्होंने 60-70 रन बनाए। वो पिच बल्लेबाजी के लिए बहुत मुश्किल थी। भारत के लिए खेलना एक जज्बा होता है और एक फाइटिंग स्पिरिट होती है तो ये हमने राहुल भाई से सीखी।