भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए शतक जड़ा था। कोहली पिछले कुछ समय से खराब फॉर्म से गुजर रहे थे। कोहली पर्थ टेस्ट की पहली पारी में पांच रन बनाकर आउट हुए थे, लेकिन उन्होंने दूसरी पारी में दमदार बल्लेबाजी करते हुए शतक जड़ा और फॉर्म में वापसी करने में सफल रहे थे। इस पर पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने कहा कि कोहली ने अपने स्टांस में बदलाव किया जिसका उन्हें फायदा मिला।
सचिन से आगे निकले थे कोहली
कोहली अपनी शतकीय पारी के दम पर ऑस्ट्रेलिया में सर्वाधिक टेस्ट शतक लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज बन गए थे। कोहली का ऑस्ट्रेलिया में यह सातवां टेस्ट शतक है, जबकि सचिन ने अपने करियर में ऑस्ट्रेलिया में छह शतक लगाए थे। इतना ही नहीं कोहली का ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट प्रारूप में यह छह साल बाद पहला शतक है। उन्होंने इससे पहले अंतिम बार ऑस्ट्रेलियाई धरती पर 2018 में इस प्रारूप में सैकड़ा जड़ा था। वहीं, टेस्ट में उन्होंने अंतिम शतक पिछले साल जुलाई में वेस्टइंडीज के खिलाफ लगाया था।
गावस्कर ने एक स्पोर्ट्स चैनल से कहा, जब कोहली दूसरी पारी में बल्लेबाजी के लिए उतरे तो काफी सहज नजर आ रहे थे। पहली पारी में भारत ने दो विकेट जल्दी गंवा दिए थे और अन्य खिलाड़ियों की तरह वह भी दबाव में थे। दूसरी पारी में स्टांस बदलने के अलावा उन्होंने अपने पांवों को भी अच्छी तरह से जमाया। मुझे लगता है कि छोटी-छोटी चीजों से सामंजस्य बिठाने से वह उस स्थिति में पहुंचे जैसा कि वह चाहते थे। ऑस्ट्रेलिया की उछाल वाली पिचों पर आपके लिए इस तरह की छोटी-छोटी चीजों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो जाता है। मुझे उनका जोश हेजलवुड पर मिडविकेट पर लगाया गया चौका बहुत अच्छा लगा। इस तरह का शॉट खेलना आसान नहीं होता है।
गावस्कर ने फेडरर, नडाल और जोकोविक से की कोहली की तलना
गावस्कर ने कोहली के हाल के संघर्ष की तुलना उस समय से की जब रोजर फेडरर, राफेल नडाल और नोवाक जोकोविच जैसे टेनिस दिग्गज खिताब नहीं जीत पाए थे। उन्होंने कहा, मैंने कमेंट्री करते हुए कहा था कि रोजर फेडरर, नोवाक जोकोविच और राफेल नडाल जैसे चैंपियन खिलाड़ी अगर सेमीफाइनल में हार जाते हैं तो लोग कहते हैं कि वह फॉर्म में नहीं थे। अगर कोई अन्य सेमीफाइनल में पहुंचता है तो कहा जाता है कि क्या शानदार प्रदर्शन है। यही बात विराट कोहली पर भी लागू होती है क्योंकि लोग उनसे हर समय शतक की उम्मीद रखते हैं। अगर वह 70 या 80 रन भी बनाता है तो लोग कहेंगे कि देखो वह रन नहीं बना पा रहा है। भारतीय प्रशंसक लालची हैं। वे अपने स्टार खिलाड़ी के 70 या 80 रन बनाने से खुश नहीं होते।