भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाज मनोज तिवारी ने मुख्य कोच गौतम गंभीर पर निशाना साधा है और उनकी जमकर आलोचना की है। मनोज ने गंभीर को पाखंडी बताया और कहा कि वह अपनी बात पर अमल नहीं करते हैं। इतना ही नहीं मनोज ने गंभीर के मुख्य कोच बनने पर ही सवाल खड़े कर दिए और उन्हें इस पद के लिए गलत विकल्प बताया है। मालूम हो कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हाल ही में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में मिली हार के बाद गंभीर प्रशंसकों और कुछ क्रिकेट विशेषज्ञों के निशाने पर हैं।
प्रशंसकों के निशाने पर चल रहे हैं गंभीर
भारत को ऑस्ट्रेलिया से पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-3 से हार का सामना करना पड़ा था और 10 साल बाद पहली बार बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी गंवाई थी और तभी से गंभीर निशाने पर चल रहे हैं। सुनील गावस्कर ने भी गंभीर के नेतृत्व वाले कोचिंग स्टाफ पर सवाल खड़े किए थे और कहा था कि खिलाड़ियों के साथ-साथ कोचिंग स्टाफ की भी आलोचना होनी चाहिए और इनसे सवाल पूछे जाने चाहिए।
मनोज ने एक स्थानीय चैनल से बात करते हुए कहा, गंभीर पाखंडी हैं। वह जो कहते हैं वो करते नहीं है। गेंदबाजी कोच की जरूरत ही क्या है? जो भी कोच कहेगा, उसे उस बात पर सहमति जतानी होगी। मोर्ने मोर्कल लखनऊ सुपरजाएंट्स से आए हैं, जबकि अभिषेक नायर कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) में गंभीर के साथ थे। भारतीय कोच को पता है कि ये दोनों उनके खिलाफ नहीं जाएंगे।
'आईपीएल के आधार पर कोच बनना गलत'
मनोज ने कोच के रूप में गंभीर की असफलता का हवाला देते हुए न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, देखिए, परिणाम आपके सामने है। परिणाम झूठ नहीं बोलते। आंकड़े गलत नहीं होते। रिकॉर्ड खुद बोलता है। गंभीर राहुल द्रविड़ के अच्छे कामों को आगे नहीं बढ़ा पाए। गंभीर को चीजों को सही करने या जीत की राह पर आने में बहुत समय लगेगा। उन्हें भारत जैसी टीम के खिलाड़ियों को कोचिंग देने का कोई अनुभव नहीं है। मैं ईमानदारी से कहूं तो मुझे नहीं लगता कि उनके पास टेस्ट या वनडे में कोचिंग देने का कोई अनुभव है। सिर्फ आईपीएल का परिणाम देखकर उन्हें मुख्य कोच नियुक्त करने का निर्णय गलत था। मेरी समझ से यह सही विकल्प नहीं था।
लक्ष्मण-बहुतुले को कोच बनाने का समर्थन किया
इस पूर्व बल्लेबाज का मानना है कि वीवीएस लक्ष्मण और साईराज बहुतुले जैसे पूर्व खिलाड़ियों को कोचिंग में पर्याप्त अनुभव है और वे भारतीय टीम के कोच के लिए आदर्श विकल्प होते। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि वीवीएस लक्ष्मण और साईराज बहुतुले जैसे पूर्व खिलाड़ी अगले मुख्य कोच बनने की कतार में थे। ये लोग पिछले कई वर्षों से एनसीए के साथ हैं। जब राहुल द्रविड़ उपलब्ध नहीं थे, तो अगला कोच ऐसे ही किसी को होना चाहिये था। द्रविड़ के मामले में उस प्रक्रिया का पालन किया जा रहा था लेकिन इस बार गंभीर कैसे आए, कोई नहीं जानता। इसलिए ऐसा परिणाम मिलना तय था।
नीतीश राणा गंभीर के समर्थन में उतरे
मनोज ने जहां गंभीर की जमकर आलोचना की, वहीं केकेआर में गंभीर के साथ लंबे समय तक रहे चुके नीतीश राणा ने भारतीय मुख्य कोच का समर्थन किया। नीतीश का कहना है कि आलोचना तथ्य के आधार पर होनी चाहिए, निजी असुरक्षा के तहत नहीं। नीतीश ने एक्स पर लिखा, आलोचना निजी असुरक्षा नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए। गौती भइया जैसा नि:स्वार्थ खिलाड़ी मैंने नहीं देखा है। वह जिस तरह हमेशा अपने कंधों पर जिम्मेदारी लेते हैं, ऐसा करते मैंने किसी को नहीं देखा। प्रदर्शन को किसी पीआर की जरूरत नहीं होती। ट्रॉफी सब कह जाती है।