टीम इंडिया की इंग्लैंड के हाथों घरेलू जमीन पर लगातार दूसरी शर्मनाक हार और नागपुर में 13 दिसंबर से शुरू हो रहे चौथे एवं अंतिम टेस्ट के लिए हुए टीम चयन पर पूर्व क्रिकेटरों और क्रिकेट पंडितों ने जमकर अपनी भडा़स निकाली है।
पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने नागपुर टेस्ट के लिए तेज गेंदबाज जहीर खान को बाहर किए जाने को तो जायज ठहराया है लेकिन उनका कहना है कि युवराज सिंह और हरभजन सिंह को बलि का बकरा बनाया गया है। उन्होंने कहा कि कई अन्य खिलाड़ियों का प्रदर्शन युवराज और हरभजन से खराब रहा, फिर उन्हें बाहर क्यों नहीं किया गया।
कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को कप्तानी से हटाए जाने के बारे में इस दिग्गज क्रिकेटर ने कहा कि मुझे नहीं लगता है कि इस समय हमारे पास धोनी का कोई विकल्प है। अगर आप जबर्दस्ती कप्तान बदलना चाहते हैं तो यह अलग बात है।
भारत के सफलतम कप्तान सौरभ गांगुली ने कप्तान धोनी ने भारत के लिए कई उपलब्धियां हासिल की हैं लेकिन उनकी मौजूदा हालत देखकर लग रहा है कि वह अपना करिश्मा खो रहे हैं। उन्होंने कहा कि चयनकर्ताओं को धोनी से पूछना चाहिए कि वह किस फार्मेट की कप्तानी करना चाहते हैं।
पूर्व क्रिकेटर और चयनकर्ता प्रमुख कृष्णामाचारी श्रीकांत ने कहा कि धोनी इस समय पूरी तरह असमंजस में दिख रहे हैं। उन्हें सूझ नहीं है कि उन्हें क्या करना है। चीजें उनके नियंत्रण से बाहर जा रही हैं और वह ऐसा होने दे रहे हैं।
पूर्व कप्तान और पूर्व चयनकर्ता दिदलीप वेंगसरकर ने कहा कि भारत ने सीरीज में अभी तक जिस तरह से प्रदर्शन किया है उससे साफ है कि मेहमान टीम इंग्लैंड देश में पूरी तैयारी के साथ आयी है लेकिन दूसरी ओर हमारी भारतीय टीम अति आत्मविश्वासी थी। भारत इस महत्वपूर्ण सीरीज के लिए पूरी तरह तैयार नहीं था। उन्होंने कहा कि जब हमारी टीम पिछले वर्ष इंग्लैंड दौरे पर गई थी तब उन्होंने वहां सीरीज से पहले केवल एक अभ्यास मैच खेला था जबकि इंग्लैंड टीम ने यहां तीन अभ्यास मैच खेले। ऑस्ट्रेलिया में भी इसी तरह भारतीय टीम की तैयारी पूरी नहीं थी।
एक अन्य पूर्व चयनकर्ता किरण मोरे ने भी कप्तान धोनी के प्रदर्शन पर उंगली उठाई। मोरे ने कहा कि हमारा प्रदर्शन तीसरे टेस्ट में कमोबेश हर विभाग में खराब था। इस विकेट पर अगर आप पहली पारी में 450 के स्कोर से पहले आउट हो जाते हैं तो मैच पहले ही आपके हाथों से निकल जाता है। लेकिन मैं अकेले कप्तान को ही जिम्मेदार ठहराना नहीं चाहता हूं क्योंकि यह सामूहिक नाकामी है।
उन्होंने कहा कि इस समय टीम इंडिया मुश्किल दौर से गुजर रही है। लेकिन टीम को एक बार फिर ट्रैक पर लाने में दो से तीन वर्ष लगेगा। लेकिन तब तक टीम के युवा खिलाड़ियों पर विश्वास रखना होगा और उन्हें खेलने का मौका देना होगा।
पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरूद्दीन ने कोलकाता टेस्ट में टीम इंडिया की हार पर निराशा जताते हुए टीम में युवाओं को मौका दिए जाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि टीम का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक था। मुझे लगता है कि अब टीम में युवाओं को अधिक मौका दिया जाना चाहिए।