चौहान किस कदर दिलेर थे इसका उदाहरण एक बार गावस्कर ने कोटला में दिया था। उन्होंने बताया था कि 1977 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी टेस्ट में वह और चौहान जिन्हें हम प्यार से मास्टर कहकर पुकारते थे बल्लेबाजी कर रहे थे। उस समय ज्योफ थाॅमसन को दुनिया का सबसे तेज गेंदबाज माना जाता था।
थाॅमसन की एक गेंद को चौहान ने स्लैश किया और गेंद बाउंड्री पार चली गई। पवेलियन में बैठे सभी खिलाड़ी मास्टर कहकर चिल्लाने लगे। उन्हें देखकर चौहान भी हंसे। उनकी थाॅमसन से निगाह मिल गई। फिर क्या था थाॅमसन आग बबूला हो गए और उनका सिर फोड़ने की बात कही।
गावस्कर ने चौहान को समझाया कि कभी पेसर को गुस्सा मत दिलाना। तो चौहान बोले वह भी राजपूत हैं उससे नहीं डरते। इसके बाद थाॅमसन ने तेज और खतरनाक गेंदबाजी चौहान को की, लेकिन वह उनकी गेंदों को झेलते गए और उफ तक नहीं किया। जब 127 गेंद खेलकर 42 रन बनाने के बाद चौहान आउट हुए तो उन्हें अस्पताल जाना पड़ा। वहां उनके अंगूठे में फ्रैक्चर निकला।