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वापसी के वनडे मैच में फ्लॉप हो गई टीम इंडिया की ये 'तिकड़ी'

Sat, 11 Jul 2015 01:40 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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जिम्बाब्वे दौरे पर नहीं जाने के लिए टीम इंडिया के सात बड़े क्रिकेटरों ने छुट्टी मांगी तो उनकी छुट्टी को स्वीकार करते हुए बीसीसीआई ने सात पुराने पड़ चुके क्रिकेटरों और कुछ नए चेहरों के साथ नई टीम तैयार कर दी।
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इस नई टीम की कमान भी नए कप्तान के रूप में अजिंक्य रहाणे को सौंप दी गई। टीम में शामिल किए गए कई क्रिकेटर ऐसे हैं जो पहले भी भारतीय टीम के लिए खेल चुके हैं लेकिन बाद में वे अपनी जगह नहीं बचाए रख सके और उन्हें वापसी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। वापसी करने वाले पुराने खिलाड़ियों में सबसे बड़ा नाम अनुभवी फिरकी गेंदबाज हरभजन सिंह का है।

डेढ़ साल पुराने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में सिर्फ 10 वनडे खेलने वाले आलराउंडर स्टुअर्ट बिन्नी ने अपने 11वें मैच में जोरदार बल्लेबाजी की और अपने करियर की सबसे बड़ी परी खेलते हुए 77 रन बना दिए। उनकी यह श्रेष्ठ पारी ऐसे समय में आई जब टीम इंडिया के पांच विकेट 87 रन पर गिर गए थे और उस पर बड़ा संकट मंडरा रहा था। बिन्नी ने अंबाती रायडू (नाबाद 124) के साथ छठे विकेट के लिए 160 रनों का साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। रायडू ने अपने करियर का दूसरा वनडे शतक लगाया।
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टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की करने में जुटे बिन्नी को इस पारी से काफी राहत मिली होगी लेकिन तीन बड़े बल्लेबाज ऐसे भी हैं जिन्होंने करीब एक साल से भी ज्यादा इंतजार के बाद वापसी की लेकिन बुरी तरह से फ्लॉप रहे।
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लंबे इंतजार के बाद की वापसी और नाकाम हो गई 'तिकड़ी'

अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में गई टीम इंडिया में से ढेरों खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्हें अपनी जगह पक्की करनी या फिर से जगह बनानी है। ऐसे में हर किसी के पास बेहतर खेल दिखाने का मौका था। लेकिन टेस्ट में टीम इंडिया के ओपनर मुरली विजय, मनोज तिवारी और रॉबिन उथप्पा जैसे बल्लेबाज अपनी वापसी को सही अंजाम नहीं दे सके। ये तीनों ही बल्लेबाज जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले मैच में बुरी तरह से नाकाम रहे। इन तीन बल्लेबाजों ने मिलकर कुल तीन रन बनाए।

शुरुआत मुरली विजय से करते हैं। मुरली टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया के नियमित सदस्य हैं और अपनी जगह पक्की कर चुके हैं। उनके शानदार फॉर्म को देखते हुए ही चयनकर्ताओं ने उन्‍‌हें वनडे टीम में शामिल किया लेकिन दो साल बाद अपने पहले वनडे मैच में वह महज एक रन बनाकर आउट हो गए। मुरली ने इससे पहले अपना अंतिम वनडे श्रीलंका के खिलाफ पोर्टऑफ स्पेन में 9 जुलाई, 2013 को किया था।

इसके बाद आते हैं मनोज तिवारी, इस बल्लेबाज को कभी प्रतिभाशाली बल्लेबाज माना जाता था लेकिन चोटों से वह परेशान रहे और टीम से बाहर हो गए। 19 जून, 2014 को अंतिम बार वनडे मैच खेलने के बाद मनोज ने इस मैच से टीम में वापसी की लेकिन वह महज दो रन ही बनाकर चलते बने। 2008 में अपना पहला वनडे खेलने वाले मनोज अब तक 10 वनडे ही खेल पाए हैं।

इन दो फ्लॉप बल्लेबाजों के बाद बारी है रॉबिन उथप्पा की जो 2006 में ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दस्तक दे चुके थे लेकिन इस बीच नौ साल के अंतराल में वह सिर्फ 44 वनडे और 11 टी-20 ही खेल पाए। नवंबर, 2014 के बाद टीम इंडिया में वापसी करते हुए वह अपने 44वें वनडे में खाता भी नहीं खोल सके।

हो सकता है कि टीम इंडिया अपने अगले मैच में मनीष पांडे को मौका दे दिया जाए। ऐसे में देखा जाए तो टीम इंडिया में अपनी जगह बनाने के सुनहरे मौके के पहले चरण को ये तीन बल्लेबाज बेहद आसानी से गंवा बैठे। वैसे भी छुट्टी पर गए खिलाड़ियों के आने के बाद इन बल्लेबाजों के पत्ते फिर कट जाएंगे लेकिन शानदार खेल से टीम में बनाए रखने का दबाव तो बना ही सकते हैं। अभी उनके पास कुछ और मौके हैं।
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