बीसीसीआई की वित्त समिति ने आज महिला क्रिकेटरों के भुगतान में वृद्धि समेत अपने सभी फैसलों को सुरक्षित रखने का फैसला किया है और प्रशासकों की समिति (सीओए) से अपनी भूमिका के बारे में स्पष्टता की मांग की है। वित्त समिति के चेयरमैन ज्योतिरादित्य सिंधिया हालांकि बैठक बीच में ही छोड़कर चले गये क्योंकि वित्त समिति की भूमिका और कार्यक्षेत्र अच्छी तरह से परिभाषित नहीं थे।
बैठक में मौजूद बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर पीटीआई से कहा, ‘‘मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल जौहरी और मुख्य वित्त अधिकारी संतोष रंगनेकर मौजूद थे, चेयरमैन सहित समिति के अन्य सदस्यों के पास उनके लिये एक ही सवाल था। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस बैठक में सीईओ ही प्रशासकों की समिति (सीओए) का प्रतिनिधि था तो उनसे पूछा गया कि क्या यह समिति स्वतंत्र फैसले ले सकती है या फिर यह कठपुतली संस्था है।’’ अधिकारी ने कहा, ‘‘समिति द्वारा पूछे गये सवाल जायज थे। मान लीजिये अगर हम कोई नीतिगत फैसला करते हैं और सीओए इसे ठुकरा देता है। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें अपनी भूमिका और कार्यक्षेत्र का दायरा जानने की जरूरत थी। जब तक यह स्पष्ट नहीं होता, हम कोई फैसला नहीं कर सकते थे क्योंकि इसमें वित्तीय लेनदेन शामिल है। ’’ उम्मीद है कि सीओए 16 सितंबर को दिल्ली में होने वाली बैठक के दौरान वित्त समिति की भूमिका और कार्यक्षेत्र दायरे को स्पष्ट करेगा।
हालांकि पता चला है कि भारत की एलीट महिला क्रिकेटर को इससे काफी फायदा होगा, उन्हें मैच फीस बढ़ने के साथ केंद्रीय अनुबंध के जरिये ग्रेड भुगतान में भी वृद्धि से लाभ होगा। रणजी क्रिकेटरों का भी भुगतान बढ़ाया जा सकता है जिन्हें अभी प्रत्येक मैच से 40,000 रूपये मिलते हैं।