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आखिरी मैच में भावुक हुए गौतम गंभीर, छोटी बेटी को गोद में लेकर फैंस के बीच बिताया समय

Mon, 10 Dec 2018 07:00 AM IST
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला, नई दिल्ली
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यह वह पल थे जब गौतम गंभीर को हर कोई उनके आगे के जीवन के लिए शुभकामनाएं देना चाहता था। चाहें दिल्ली की टीम हो या फिर आंध्र प्रदेश के क्रिकेटर या फिर डीडीसीए के पदाधिकारी हर कोई गौतम को उपहार दे रहा था और उनके साथ फोटो खिचा रहा था, लेकिन उन्हें फिरोजशाह कोटला के एक कोने में गौती-गौती चिल्ला रहे सैकड़ों की संख्या में मौजूद दर्शकों का ख्याल आया।
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उन्होंने अपनी छोटी बेटी अनेजा को गोद में लिया और टीम के साथियों की ओर से बुलाए जाने के बावजूद अपने फैंस से मिलने के लिए चल दिए। कोटला के ग्राउंड स्टाफ के साथ भी उन्होंने इन पलों को कैमरे में कैद किया।
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वाकई गौतम के लिए यह बेहद भावुक पल थे। इस फेयरवेल में 2007 के टी-20 विश्व कप फाइनल में उनके साथी जोगिंदर शर्मा भी आए और गौतम को शुभकामनाएं दीं। अंतिम रणजी मैच में शतक लगाने के बावजूद गौतम को दुख इस बात का था कि उनकी टीम जीत नहीं पाई और छह अंक लेने से वंचित रह गई।

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गौतम ने कहा बतौर पेशेवर उनकी कोशिश हमेशा जीत रही। दिल्ली को जीत के लिए 88 रनों का लक्ष्य मिला था, लेकिन खराब रोशनी के चलते खेल रोकना पड़ा। उस वक्त दिल्ली ने 41 रन दो विकेट खोकर बनाए थे।
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डीडीसीए अध्यक्ष रजत शर्मा ने गौतम को वह पेंटिंग दी जिसमें वह दिल्ली के लिए रणजी ट्रॉफी उठा रहे हैं। इस दौरान उनकी पत्नी नताशा मां सीमा और दोनों बेटियां मौजूद रहीं। गौतम ने इस दौरान राजनीति से जुडने की चर्चाओं को विराम दे दिया।
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उन्होंने साफ किया यह महज अफवाह है। उन्होंने कभी इस बारे में नहीं सोचा। उन्हें इन खबरों के बारे में लगा, लेकिन उन्होंने ट्विटर का इस्तेमाल इस देश हित और समाज सेवी कार्यों के लिए किया है। हालांकि गौतम ने यह जरूर कहा कि वह डीडीसीए से बतौर सरकारी नॉमिनी के रूप में जुड़े रहेंगे और दिल्ली के क्रिकेट के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
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उन्होंने व्यंगात्मक लहजे में कहा कि अब डीडीसीए में रहने के लिए उनके ऊपर किसी तरह हितों के टकराव का मामला नहीं है। बतौर कोच नई पारी शुरूआत करने के बारे में गौतम ने कहा कि उनकी पूरी जिंदगी एक्शन से भरी रही है।

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वह बंद एसी कमरे में और कमेंट्री करके नहीं रह सकते हैं। वह जो भी कार्य करेंगे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करेंगे। उनके लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह फैसला लेने की है कि वह आगे क्या करेंगे।
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गौतम ने क्रिकेट से संन्यास के बाद अपनी पूरी किट टीम को दे दी। गौतम ने कहा कि अब उनके लिए इस किट का कोई काम नहीं रह गया। यह युवाओं केलिए है इस लिए उन्होंने कल अपनी किट और बैट टीम के साथियों को दे दिए।
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