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Dilip Doshi: डेब्यू मैच में अपनी फिरकी से कंगारुओं को जमकर नचाया, भारतीय क्रिकेट के 'नवरत्नों' में रहे शामिल

Tue, 24 Jun 2025 09:01 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिलीप देश के उन नौ  गेंदबाजों में शामिल हैं, जिन्होंने अपने डेब्यू टेस्ट की एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लिए। वह सटीक गेंदबाजी के लिए जाने जाते थे। दिलीप के निधन को लेकर पूर्व क्रिकेटरों की प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं।
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दिलीप दोषी - फोटो : Saurashtra Cricket Association
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विस्तार
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भारत के दिग्गज बाएं हाथ के स्पिनर दिलीप दोषी का दिल का दौरा पड़ने से लंदन में 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया। दोषी ने भारत के लिए 33 टेस्ट मैच और 15 वनडे मैच खेले। टेस्ट में उन्होंने 114 विकेट और वनडे में 22 विकेट हासिल किए। दिलीप को बेहद दिमागदार गेंदबाज माना जाता था। महान गैरी सोबर्स भी उनकी गेंदबाजी से प्रभावित थे। सुनील गावस्कर ने दोषी को हमेशा उच्चस्तरीय स्पिनर बताया।
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उन्होंने 32 साल की उम्र में 1979 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था। इस मुकाबले में उन्होंने एक पारी में 103 रन देकर छह विकेट चटकाए। उन्होंने इस टेस्ट में कुल आठ विकेट लिए। वह देश के उन नौ  गेंदबाजों में शामिल हैं, जिन्होंने अपने डेब्यू टेस्ट की एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लिए।

डेब्यू टेस्ट पर 5फर लेने वाले भारतीय गेंदबाज
खिलाड़ी का नाम वर्ष विरोधी टीम स्थान
मोहम्मद निसार 1932 इंग्लैंड लॉर्ड्स
वमन कुमार 1961 पाकिस्तान दिल्ली
सैयद आबिद अली 1967 ऑस्ट्रेलिया एडिलेड
दिलीप दोषी 1979 ऑस्ट्रेलिया मद्रास
नरेंद्र हिरवानी 1988 वेस्टइंडीज मद्रास
अमित मिश्रा 2008 ऑस्ट्रेलिया मोहाली
रविचंद्रन अश्विन 2011 वेस्टइंडीज दिल्ली
मोहम्मद शमी 2013 वेस्टइंडीज कोलकाता
अक्षर पटेल 2021 इंग्लैंड चेन्नई
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ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान को हराया
दिलीप की बदौलत भारत ने 70 और 80 के दशक में ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान पर जीत हासिल की। 1981 के मेलबर्न टेस्ट में उन्होंने पैर की टूटी अंगुली के बावजूद पांच विकेट लिए। 1983 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 898 विकेट चटकाए। लंबे समय से लंदन में रह रहे दिलीप अपने पीछे पत्नी कालिंगी, पुत्र नयन और पुत्री विशाखा को छोड़ गए हैं। उनके पुत्र नयन दोषी सरे और सौराष्ट्र के लिए प्रथम श्रेणी में खेले।

पैर में फ्रैक्चर, फिर भी खेला टेस्ट
दिलीप दोषी के निधन पर सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन ने लिखा- दिलीप भाई का क्रिकेट के प्रति जुनून असाधारण और अतुलनीय था। उन्होंने 1981 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न टेस्ट में अपने पांच विकेट लेने को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना। पैर के अंगूठे में फ्रैक्चर और तेज दर्द के बावजूद उन्होंने गेंदबाजी जारी रखी। उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उन्हें विश्वास था कि टीम इंडिया मैच जीतेगी। खेल के प्रति उनका जुनून इतना गहरा था। सर गारफील्ड सोबर्स ने सही कहा था कि दिलीप दोषी के पास उन लोगों को देने के लिए अपार ज्ञान है जो पेशेवर क्रिकेट में उनके रास्ते पर चलना चाहते हैं। उन्होंने दुनिया भर में सभी स्तरों पर खेला है और स्पिन गेंदबाजी की कला के बारे में बात करने के लिए उनसे अधिक योग्य कोई नहीं हो सकता।'

निरंजन शाह ने भी जताया दुख
सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष जयदेव शाह ने कहा- लंदन में दिलीप भाई को दिल का दौरा पड़ा। वह अब हमारे बीच नहीं हैं।' बीसीसीआई के पूर्व सचिव निरंजन शाह ने कहा, 'दिलीप का निधन मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। वह परिवार की तरह थे। वह बेहतरीन इंसानों में से एक थे।' भारतीय घरेलू सर्किट में उन्होंने बंगाल और सौराष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया। कुल मिलाकर उन्होंने प्रथम श्रेणी में 898 विकेट चटकाए। इसमें उन्होंने 43 बार पारी में पांच विकेट लिए। वे कई वर्षों तक रणजी ट्रॉफी में बंगाल के सबसे अहम खिलाड़ी रहे।

भारत के सबसे सटीक गेंदबाजों में से एक
उस दौर में बिशन सिंह बेदी भारत के सबसे महान बाएं हाथ के स्पिनर रहे, वहीं उनके बाद दोषी सबसे बेहतरीन स्पिनरों में से एक माने जाते थे, जो जरूरत पड़ने पर गेंद को फ्लाइट करते थे और अपने करियर के अधिकांश समय में उन्होंने विकेट टू विकेट सटीक गेंदबाजी की। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की टीमों को उनके आर्म बॉल को खेलना हमेशा मुश्किल लगता था। चश्मा पहने यह क्रिकेटर दिल से एक सज्जन व्यक्ति था। मियांदाद अक्सर खेल के बीच में उनके कमरे के नंबर के बारे में पूछकर उन्हें चिढ़ाते थे। 'कपिल शर्मा शो' में सुनील गावस्कर ने भी एक बार ये कहानी सुनाई थी। मियांदाद मैच के बीच में दिलीप से पूछते थे, 'ऐ दिलीप तेला लूम नंबर क्या है।'

कुंबले ने भी जताया दुख
रिटायरमेंट के बाद दिलीप लंदन चले गए थे, जहां वे एक सफल व्यवसायी बन गए। वे अपना अधिकांश वक्त लंदन, मुंबई और राजकोट में ही गुजारते थे। यह काफी अजीब बात थी कि बीसीसीआई ने कभी भी दोषी की विशेषज्ञता का उपयोग करने की जहमत नहीं उठाई। भारत के पूर्व कप्तान अनिल कुंबले ने भी दिवंगत क्रिकेटर को श्रद्धांजलि दी। कुंबले ने लिखा, 'दिलीप भाई के निधन के बारे में सुनकर दिल टूट गया। भगवान उनके परिवार और दोस्तों को इस दुख को सहने की शक्ति दे।'
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सचिन को कराया था नेट अभ्यास
वहीं, सचिन तेंदुलकर ने दुख जताते हुए लिखा, 'मैं दिलीप भाई से पहली बार 1990 में यू.के. में मिला था और उस दौरे पर उन्होंने नेट्स में मेरे लिए गेंदबाजी की थी। वह वास्तव में मुझसे बहुत प्यार करते थे और मैंने भी उनकी भावनाओं का जवाब दिया। दिलीप भाई जैसे गर्मजोशी से भरे व्यक्ति की बहुत याद आएगी। मैं उन क्रिकेट संबंधी बातचीत को बहुत याद करूंगा जो हम हमेशा किया करते थे। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। ॐ शांति।'
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