प्रशासकों की समिति (सीओए) की सदस्य डायना इडुल्जी ने सोमवार को विरोध जताया लेकिन इसके बावजूद कपिल देव की अगुआई वाली सलाहकार समिति (सीएसी) को हितों के टकराव मामले में 2-1 से पाक साफ करार दिया गया। इसके साथ ही इनके द्वारा भारतीय पुरुष टीम के कोच की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया। उम्मीदवारों का इंटरव्यू इसी माह के मध्य में होगा। इसके बाद नियुक्त की जाएगी।
देश के पहले विश्व कप विजेता कप्तान कपिल के अलावा अंशुमन गायकवाड़ और पूर्व महिला कप्तान शांता रंगास्वामी नव नियुक्त क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) के सदस्य हैं। सीओए की आठ अगस्त को उच्चतम न्यायालय की सुनवाई से पहले राजधानी में बैठक हुई जिसमें कई मसलों पर चर्चा की गई। इडुल्जी का नजरिया समिति के अध्यक्ष विनोद राय और एक अन्य सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) रवि थोडगे से मेल नहीं खाता था।
बीसीसीआई के एक वर्ग ने हालांकि इडुल्जी के इरादों पर सवाल उठाया। सीएसी ने महिला कोच का भी चयन किया था और इडुल्जी ने समिति के गठन और डब्ल्यूवी रमन की नियुक्ति को गैरकानूनी बताते हुए इसका विरोध किया था। सूत्रों से पता चला है कि इडुल्जी ने सीओए की इससे पहले हुई बैठक में भी कपिल की अध्यक्षता में सीएसी के गठन का विरोध किया था और वह चाहती थीं कि चुनाव तक निवर्तमान कोच रवि शास्त्री अपने पद पर बने रहें।
पूर्व में हुई बैठक में जो हुआ उसकी जानकारी रखने वाले बीसीसीआई के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘पिछली बैठक में सीओए का एक सदस्य नहीं चाहता था कि इस समिति का गठन हो। शास्त्री की पुन: नियुक्ति को लेकर उनकी कुछ आशंकाएं हो सकती हैं। कुछ लोगों का मानना है कि अगर शास्त्री को अब दो साल के लिए नियुक्त किया गया तो उन्हें तब भी पद से नहीं हटाया जा सकेगा जब बीसीसीआई केचुनाव हो जाएंगे।’ उन्होंने कहा, ‘यह संभव हो सकता है कि अगर रवि के कार्यकाल को तदर्थ रूप से चुनाव तक बढ़ाया जाता है तो बीसीसीआई के नए पदाधिकारियों के पास उनकी पुन: नियुक्ति पर विचार करने का अधिकार होगा।’
सीओए सदस्य डायना इडुल्जी ने कहा ‘यह फैसला करना सीओए के अधिकार क्षेत्र में नहीं है कि कौन हितों के टकराव के दायरे में है और कौन नहीं। यह काम आचरण अधिकारी को करना है। मैं अपने पूर्व के रुख पर कायम हूं। तदर्थ समिति कोच नहीं चुन सकती। यह संविधान में नहीं है।’