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खुलासा: 'विराट कोहली के कहने पर कोच पद से हटाए गए थे अनिल कुंबले'

Wed, 12 Dec 2018 09:23 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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महिला क्रिकेट टीम के कोच पद की तलाश जैसे-जैसे तेज होती जा रही है, इससे जुड़ा विवाद भी गहराते जा रहा है। दरअसल, महिला क्रिकेट टीम के नए कोच के अनुबंध को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित दो सदस्यीय प्रशासकों की समिति (सीओए) में घमासान मच गया है। 
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सीओए चेयरमैन विनोद राय और सदस्य डायना एडुल्जी की इस मुद्दे को लेकर तकरार खुलकर सामने सतह पर आ गई है। 

कोच के चयन को राय के इशारे पर कपिल देव, अंशुमन गायकवाड़ और शांता रंगास्वामी की गठित की गई तीन सदस्यीय कमेटी को डायना ने एकतरफा फैसला करार दिया। साथ-साथ उन्होंने एक ऐसा खुलासा कर डाला, जिसे शायद विराट कोहली के फैंस आसानी से पचा नहीं पाएंगे।
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विनोद राय और डायना के बीच हुई बहसबाजी में इस पूर्व महिला क्रिकेटर ने खुलासा कर डाला कि अनिल कुंबले को विराट कोहली के कहने पर हटाया गया। उन्होंने यह बात हरमनप्रीत और स्मृति की ओर से कोच पोवार के समर्थन में लिखे गए ईमेल के पक्ष में कही। 

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डायना ने लिखा कि जिस तरह विराट ने सीईओ को कोच बदलने के बारे में एसएमएस किए जिसके आधार पर राय ने कोच को बदला उसी तरह इन दोनों महिला क्रिकेटरों का कोच के समर्थन में उतरना कुछ गलत नहीं था। 
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- फोटो : Twitter
डायना ने लिखा उन्होंने कुंबले को हटाए जाने का भी विरोध किया था। उन्होंने इसका भी विरोध किया था कि किस तरह विराट की पसंद के कोच को रखने के लिए कोच के आवेदन की समय सीमा को बढ़ाया गया था।
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इस पूरी प्रक्रिया में कुंबले एक खलनायक की तरह पेश किए गए, लेकिन वह एक महान व्यक्ति की तरह चुपचाप निकल गए। जिसका वह सम्मान करती हैं। कोच के अनुबंध की प्रक्रिया में उस दौरान भी नियम तोड़े गए थे जिस पर उन्होंने आपत्ति जताई थी। 
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- फोटो : PTI
इसके जवाब में राय ने मेल में स्वीकार किया कि हां, विराट और कुंबले में मतभेद जिसके परिणामों के चलते कुंबले को कोच पद से विदा होना पड़ा, लेकिन यहां फैसला महिला क्रिकेट के भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया है।  
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- फोटो : twitter
मेल के जरिए दोनों के बीच हुई लंबी बहस 

ईमेल के जरिए दोनों के बीच हुई लंबी बहस के बाद डायना ने राय के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें अकेले फैसला लेने का अधिकार नहीं है। उनकी तरह उन्हें भी सुप्रीम कोर्ट ने सीओए सदस्य के रूप में रखा है। उन्हें भी उतना ही अधिकार प्राप्त है जितना विनोद राय को।

ऐसे में बिना उनकी सहमति और संस्तुति के बिना कोई फैसला नहीं लिया जा सकता है। यह कहकर उन्होंने सीईओ और जीएम को राय के इस फैसले पर कोई आगे की कार्रवाई नहीं करने को कहा। 
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