मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक धोनी और सहवाग के बीच में शुरू से ही मतभेद रहे हैं और दोनों एक दूसरे को पसंद नहीं करते हैं।
बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और सीएसके के मालिक एन श्रीनिवासन भी धोनी को टीम में शामिल करने के मुड में नहीं थे। 2008 में सीएसके के चीफ सेलेक्टर और डायरेक्ट ऑफ क्रिकेट ऑपरेशन रहे एन चंद्रशेखर ने कहा कि नीलामी से पहले जब श्रीनिवासन ने जब मुझे पूछा कि आप किसे खरीदना चाहेंगे तो मेरा जवाब था धोनी।
मेरे जवाब को सुनकर उन्होंने मुझसे पूछा धोनी क्यों
सहवाग क्यों नहीं। तो मैंने कहा था, 'सहवाग में वह बात नहीं है जो धोनी में है।' धोनी टीम के कप्तान, विकेटकीपर और बल्लेबाज होंगे, जो कभी भी अपने दम पर मैच का रुख अपनी ओर मोड सकते हैं।
श्रीनिवासन मेरी बात से सहमत हुए और 2008 नीलामी के दिन वह मेरे पास आए और कहा जाओ खरीद लो धोनी को। हालांकि नीलामी में धोनी को खरीदना इतना आसान नहीं था। टीम मैनेजमेंट ने मुझे धोनी के लिए 1.1 लाख डॉलर खर्च करने की अनुमति दी थी लेकिन कॉम्पिटिशन को देखकर यह रकम 1.4 लाख डॉलर कर दी गई थी।
नीलामी में मुझे किसी ने कहा था कि धोनी 1.8 लाख डॉलर में बिकेंगे। इस पर मैंने उनसे कहा था कि अगर मैं धोनी को 1.5 लाख डॉलर में नहीं खरीद पाया तो मैं वहीं रूक जाउंगा। लेकिन आखिरकार हम धोनी को 1.5 लाख डॉलर में खरीदने में कामयाब रहे।