भारत और बांग्लादेश के बीच तीन नवंबर को अरुण जेटली स्टेडियम में होने वाले टी-20 मुकाबले पर कहीं प्रदूषण रोड़ा न बन जाए। प्रदूषण की मार को लेकर दिल्ली जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिसके चलते डीडीसीए ने फैसला लिया है कि मंगलवार को उसकी ओर से बीसीसीआई को दिल्ली की प्रदूषण की स्थिति के बारे में बताया जाएगा। इसके बाद बोर्ड को जो भी फैसला लेना हो वह अपने स्तर पर ले। ऐसा कर डीडीसीए गेंद बोर्ड के पाले में डालने जा रहा है। दरअसल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से भविष्यवाणी की गई है कि नवंबर के पहले सप्ताह में दिल्ली में प्रदूषण बेहद खराब स्तर पर जा सकता है। इसके बाद से ही डीडीसीए की परेशानी बढ़ी है।
डीडीसीए के एक पदाधिकारी का कहना है कि यह मैच बीसीसीआई ने उन्हें दिया है। उन्हें इसका ध्यान रखना चाहिए था कि दिल्ली में दिवाली के तुरंत बाद प्रदूषण बेहद खराब स्तर पर चला जाता है। इसमें डीडीसीए कुछ नहीं कर सकता है। डीडीसीए ने बीसीसीआई से मैच नहीं मांगा था। अगर मैच देना था तो सीरीज का अंतिम मैच दिया जा सकता था। हालांकि डीडीसीए को उम्मीद है कि मैच रद्द नहीं होगा और इसका आयोजन तय समय पर होगा। तैयारियां भी सारी पूरी हो चुकी हैं, लेकिन दो वर्ष पूर्व भारत और श्रीलंका के बीच कोटला में हुए टेस्ट मैच जैसी स्थितियां यहां न पैदा हों इसका डर डीडीसीए को सता रहा है।
प्रदूषण को कम करने के लिए डीडीसीए ने फायर विभाग से स्टेडियम के चारों ओर पेड़ों पर छिड़काव करने के लिए कहा है साथ ही खुद भी पानी के टैंकरों से छिड़काव कराने का फैसला लिया है।
दिक्कत यह है कि डीडीसीए की ओर से ऑन लाइन टिकटों की बिक्री शुरू कर दी गई है। पदाधिकारी के मुताबिक 75 लाख रुपये के टिकट बिक चुके हैं।
दिसंबर 2017 में श्रीलंका क्रिकेट टीम को इसी मैदान पर प्रदूषण के बढ़े हुए स्तर के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। तब इस मैदान को फिरोजशाट कोटला के नाम से जाना जाता था। श्रीलंका के खिलाड़ी प्रदूषण से बचाव करने वाले मास्क पहनकर भी उतरे थे लेकिन इसके बावजूद कुछ खिलाड़ी बीमार हो गए थे।