बांबे हाईकोर्ट ने मध्यस्थ के यथास्थिति बनाए रखने के आदेश पर शनिवार को अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। इससे एक महीने की कानूनी जंग के बाद कर्ज में डूबी डेक्कन चार्जर्स ने आईपीएल टीम का दर्जा खो दिया है। डेक्कन के मालिक कोर्ट के पास 100 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करने में नाकाम रहे थे। यह इस टीम को बनाए रखने के लिए एक शर्त थी। बाद में उन्होंने अदालत से नियुक्त मध्यस्थ का सहारा लिया, जिन्होंने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। बीसीसीआई ने मध्यस्थ के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी, जिसकी शनिवार सुबह सुनवाई की गई। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मध्यस्थ के आदेश पर रोक लगा दी।
इसका मतलब यह हुआ कि बीसीसीआई का डेक्कन का अनुबंधन समाप्त करने का फैसला कायम रहेगा और बोर्ड नई फ्रेंचाइजी के लिए निविदा जारी करने के लिए स्वतंत्र है। इससे अब पेच फंस गया है क्योंकि हैदराबाद फ्रेंचाइजी के मालिक डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग्स ने पिछले बृहस्पतिवार को ही मुंबई स्थित रियल एस्टेट कंपनी कमला लैंडमार्क के हाथों रियल एस्टेट होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के हाथों अपनी टीम को बेच दिया था, जिसकी सूचना उन्होंने शुक्रवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बांबे स्टॉक एक्सचेंज को दे दी थी।
लिहाजा फ्रेंचाइजी के प्रस्तावित बिक्री पर अनिश्चितता बन गई है। यह भी अभी साफ नहीं हो पाया है कि डेक्कन चार्जर्स के खिलाड़ियों को उनका भुगतान कैसे मिलेगा। अब सवाल यह है कि क्या बीसीसीआई डेक्कन की प्रस्तावित बिक्री को मंजूरी देगा या नहीं। डेक्कन चार्जर्स उम्मीद कर रही थी कि टीम को बेचने से उनकी वित्तीय समस्याएं निपट जाएंगी लेकिन 13 सितंबर को चेन्नई में हुई नीलामी में उन्होंने एकमात्र बोली से इनकार कर दिया था।
हैदराबाद की कंपनी पीवीपी वेंचर्स लिमिटेड ने 900 करोड़ रुपए की पेशकश की थी लेकिन डेक्कन ने इसे खारिज कर दिया था। डीसीएचएल ने हैदराबाद फ्रेंचाइजी को 2008 में 428 करोड़ रुपये में खरीदा था। नीलामी के समय इसका बेस प्राइस करीब 750 करोड़ रुपए का था।