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Rohit Sharma Era: विराट को निभाना होगा सचिन का रोल, 100 शतक लगाने के लिए हर साल छह शतक जरूरी

Wed, 24 Nov 2021 05:53 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रोहित शर्मा की कप्तानी में विराट कोहली को सचिन की तरह बल्ले से योगदान देना होगा। अगर उन्हें आने वाले समय में 100 शतक पूरे करने हैं तो उन्हें अगले पांच साल तक हर साल छह शतक लगाने होंगे। 
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सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारत की टी-20 टीम के नियमित कप्तान बनने के बाद पहली सीरीज में रोहित शर्मा का प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्होंने न सिर्फ भारत को 3-0 से जीत दिलाई बल्कि बल्ले के साथ भी सबसे ज्यादा रन बनाए। टी-20 में 50 से ज्यादा का स्कोर बनाने के मामले में भी उन्होंने विराट को पीछे छोड़ दिया है। इसके साथ ही कई दिग्गजों का मानना है कि विराट को वनडे की कप्तानी छोड़कर अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान देना चाहिए। पूर्व भारतीय कोच रवि शास्त्री ने भी कहा था कि विराट आने वाले समय में वनडे की कप्तानी छोड़ सकते हैं। अगर विराट को सचिन को 100 शतकों का रिकॉर्ड तोड़ना है तो उन्हें अपनी फॉर्म फिर से हासिल करनी होगी और अगले पांच सालों तक हर साल छह शतक लगाने होंगे। 
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आलोचक हमेशा से ही वनडे और टी-20 क्रिकेट में विराट की कप्तानी पर सवाल उठाते रहे हैं। वो अपनी कप्तानी में न तो कोई आईपीएल ट्रॉफी जीत पाए हैं और न ही कोई आईसीसी टू्र्नामेंट। वहीं उनकी तुलना में रोहित ने सबसे ज्यादा पांच आईपीएल ट्रॉफी जीती हैं। ऐसे में विराट कप्तानी छोड़कर अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान लगा सकते हैं और सचिन के बाद 100 शतक लगाने वाले दूसरे भारतीय बन सकते हैं। 

विराट ने वह मुकाम हासिल किया जो सभी पाना चाहते हैं
भारतीय क्रिकेट में विराट कोहली ने पिछले कुछ सालों में राज किया है। उन्होंने तीनों फॉर्मेट में भारत की कप्तानी की है और लगातार रन भी बनाए हैं। विज्ञापन की दुनिया में भी उनका जलवा रहा और इस दौरान उन्होंने खूब विज्ञापन भी किए। विराट ने जो हासिल किया है वो भारत का हर खिलाड़ी हासिल करना चाहेगा। वहीं कोई भी दूसरा खिलाड़ी या बीसीसीआई का अधिकारी नहीं चाहेगा कि एक खिलाड़ी इतने लंबे समय तक महत्वपूर्ण पदों पर रहे। ऐसे हालातों में विराट 2017 से तीनों फॉर्मेट के कप्तान रहे हैं। भारत के कप्तान का पद मुश्किलों और खतरों से भरा रहता है और लगातार आपके ऊपर निशाना साधा जाता है। इन चीजों से बचने के लिए विराट को वनडे की कप्तानी से भी दूरी बनानी चाहिए।  
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पिछले दो सालों में रोहित का प्रदर्शन विराट से बेहतर
हालिया प्रदर्शन की बात करें तो पिछले दो सालों में रोहित ने विराट से बेहतर बल्लेबाजी की है। उन्होंने जनवरी 2020 से लेकर अब तक 11 टेस्ट में 47.68 के औसत से 906 रन बनाए हैं, जबकि विराट ने 12 टेस्ट में 26.80 के औसत से 563 रन बनाए हैं। इस दौरान रोहित ने दो शतक भी लगाए हैं, जबकि विराट के बल्ले से कोई शतक नहीं निकला। वहीं इस दौरान नौ वनडे में रोहित ने 57.66 के औसत से 519 रन बनाए हैं, जबकि विराट ने 15 मैचों में 43.26 के औसत से 649 रन बनाए हैं। रोहित ने इस दौरान वनडे में भी दो शतक लगाए हैं, जबकि विराट के बल्ले से कोई शतक नहीं निकला। इसके साथ ही रोहित ने इंग्लैंड के मुश्किल हालातों में नई गेंद का सामना किया और खूब रन भी बनाए। वहीं चौथे नंबर पर आने के बावजूद रनों के लिए जूझते रहे। इस वजह से भी उनकी कप्तानी पर सवाल उठ रहे हैं। 

क्या गंभीर और सहवाग की राह पर हैं कोहली
भारतीय क्रिकेट में कई दिग्गज खिलाड़ी 30 साल के बाद अपनी फॉर्म खो देते हैं और अगले तीन-चार सालों में उन्हें संन्यास लेना पड़ता है। गौतम गंभीर, वीरेन्द्र सहवागस हरभजन सिंह और युवराज सिंह इसके उदाहरण हैं। ये सभी खिलाड़ी भारत के सुपर स्टार रहे हैं, लेकिन 30 साल की उम्र के बाद उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा और बाद में उन्हें संन्यास के लिए आखिरी मैच भी नहीं नसीब हुआ। सुरेश रैना का नाम भी इनमें शामिल हैं। इससे यह भी सवाल उठता है कि क्या भारत के ज्यादा क्रिकेट खेलने से और खिलाड़ियों पर ज्यादा दबाव बनाने से उनके अंदर की ऊर्जा कुछ सालों बाद ही खत्म हो जाती है। अगर वाकई में ऐसा है तो विराट को अपना वर्कलोड और कम करना होगा। 

रोहित की कप्तानी में खेलना विराट के लिए फायदेमंद
भारत में कप्तान का पद बहुत मुश्किलों से भरा होता है। बड़े मैच में एक हार और फैंस से लेकर पूर्व क्रिकेटर तक सब यह भूल जाते हैं कि आपने इससे पहले क्या किया है। इस टी-20 वर्ल्डकप में पाकिस्तान के खिलाफ भारत की हार के बाद विराट के साथ भी ऐसा ही हुआ। उन्होंने इस मैच में अधर्शतकीय पारी खेली थी और भारत का स्कोर अपने दम पर 150 के ऊपर ले गए थे, लेकिन सभी ने उनकी उस पारी को भुला दिया। उनके ऊपर जमकर सवाल उठे और उन्हें कई बेतुके सवालों का सामना भी करना पड़ा। अगर विराट को अपने खेल पर ध्यान बनाए रखना है तो इन चीजों से बचना होगा। ऐसे में उनके लिए बेहतर होगा कि कप्तानी में अपना ध्यान भटकाने की बजाय बल्लेबाजी पर ध्यान दें और भारत को अपने दम पर मैच जिताएं। 
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