हर बच्चों की ख्वाहिश बड़ा होकर कुछ बनने की होती है। किसी का लक्ष्य डॉक्टर बनना होता है तो कोई इंजीनियर बनना चाहता है। कोई आर्मी में जाना जाता है और तो कोई नेता तो कोई वकील बनना चाहता है। वैसे ही टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी बचपन में सैनिकों से काफी प्रेरित थे।
उन्होंने कहा कि वह एक दिन बड़ा होकर फौजी बनना चाहते थे। लेकिन उनकी किस्मत में कुछ और ही लिखा था, वह क्रिकेटर बन गए। धोनी ने अपने दिल की यह बात रांची में पैराशूट रेजिमेंट के साथ एक दिन की ट्रेनिंग के दौरान जवानों के परिवारों से मुलाकात के दौरान कही।
धोनी टेरीटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल भी हैं। बकौल धोनी, ‘बचपन से मैं आर्मी ज्वाइन करना चाहता था। सैनिकों को देखकर मैं हमेशा सोचता था कि मैं भी उन जैसा बनूंगा लेकिन ऐसा हो न सका। आर्मी की वर्दी देख मेरे अंदर का सारा डर भाग जाता है। मेरे लिए आर्मी की यूनिफॉर्म बहुत खास है।’
यह पूछे जाने पर कि आप मुकाबलों के दौरान तनाव से खुद को कैसे बचाते हैं। धोनी ने मजाकिया अंदाज में कहा, ‘प्रेस कांफ्रेंस से एक दिन पहले मैं फ्रिज में जाकर बैठ जाता हूं। इसी कारण कोई कैसा भी सवाल पूछे मैं हमेशा शांत रहता हूं।’
धोनी की कप्तानी में चेन्नई की टीम चैंपियंस लीग के सेमीफाइनल में पहुंच गई है। उल्लेखनीय है कि बतौर क्रिकेटर धोनी भारत के विश्व विजेता कप्तान बने। उन्होंने भारत के पहले विश्व विजेता कप्तान कपिल देव को काफी पीछे छोड़ दिया। वह आईसीसी की तीनों ट्रॉफी जीतने वाले पहले कप्तान बने।