कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सरकार द्वारा कई दिशानिर्देश जारी किए गए हैं और साथ ही कई तरह के कदम भी उठाए गए। इन सबके बाद बीसीसीआई के पास टूर्नामेंट को कुछ दिनों के लिए स्थगित करने के अलावा कोई अन्य विकल्प मौजूद नहीं था।
इसी को देखते हुए बीसीसीआई ने शुक्रवार को काफी सोच-विचार के बाद आईपीएल के 13वें संस्करण को दो हफ्ते के लिए टालने का फैसला किया और टूर्नामेंट को 29 मार्च की जगह 15 अप्रैल से करवाने के लिए तैयार हुई।
हालांकि अभी भी बोर्ड के सामने फ्रैंचाइजियों और प्रसारकों के कई तरह के सवाल हैं, जिसे लेकर सोमवार को एक अहम बैठक भी होनी है। इस बैठक में आयोजन स्थल, विदेशी खिलाड़ियों के खेलने और टूर्नामेंट की नई तारीखों समेत खाली मैदान में खेलने के मुद्दों पर चर्चा होने के आसार हैं। वहीं इससे पहले शनिवार को आईपीएल गवर्निंग काउंसिल भी आपस में एक महत्वपूर्ण बैठक करेगी और कुछ मामलों पर चर्चा करेगी।
WHO Advisory about Corona Virus
- फोटो : Amar Ujala
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा कोरोना को महामारी घोषित करने के बाद दुनियाभर की खेल प्रतियोगिताओं पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। दुनियाभर में 5000 से अधिक मौतों और सवा लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने की वजह से हर तरफ यात्रा पाबंदियों से लेकर कई तरह की सावधानियां भी बरती जा रही हैं। लोगों के भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने और हाथ ना मिलाने जैसी हिदायतें भी दी जा रही हैं।
स्वास्थ और सुरक्षा की दृष्टि से फुटबॉल, बैडमिंटन, क्रिकेट समेत विभिन्न खेलों के कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
बीसीसीआई ने इस मामले में फैसला लेने में थोड़ा समय अधिक ले लिया और बोर्ड ने आखिरी तक टूर्नामेंट को करवाने की अपनी कोशिशें जारी रखी। लेकिन खेल मंत्रालय द्वारा सख्त हिदायत और देशभर से उठ रह विरोध को देखते हुए उसे ना चाहते हुए भी तारीखों को आगे बढ़ाना पड़ा।
लेकिन बीसीसीआई के सामने स्वास्थ, सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक स्तर की भी चिंता थी। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट लीग के रद्द होने पर कई हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है। इतना ही नहीं टूर्नामेंट के रद्द होने पर हजारों नौकरियां भी दांव पर लगेंगी। इन सब कारणों को देखते हुए बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने भी कहा कि फिलहाल के लिए आईपीएल को टाल रहे हैं।
रिपोर्ट्स की मानें तो आठ अलग-अलग फ्रैंचाइजियों को जहां 300-400 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ता, वहीं प्रसारकों, आयोजकों, स्पांसर को भी हजारों करोड़ रुपये का भारी नुकसान होता। बात करें भारतीय बोर्ड की तो सिर्फ बीसीसीआई को ही इससे कम से कम 3500 करोड़ रुपये का नुकसान होता।
इसके अलावा अलग-अलग शहरों में होने वाले आयोजन की वजह से यात्रा, होटल, ट्रांसपोर्ट जैसे कई क्षेत्रों में रोजगार को भी भार नुकसान होगा। अप्रत्यक्ष तौर पर हजारों की संख्या में नौकरियों पर भी खतरा मंडराएगा। अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक कुल मिलाकर भारत की इस चर्चित टी-20 लीग के रद्द होने की सूरत में करीब दस हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा।
फिलहाल इन सभी बातों पर विराम लग गया है और बीसीसीआई ने अपने सबसे अच्छे विकल्प को ही चुना है लेकिन अभी भी टूर्नामेंट के सफल आयोजन पर आखिरी फैसला आना बाकी है क्योंकि अगर 21 अप्रैल के डेडलाइन पर आयोजन शुरू नहीं होता है तो रिपोर्ट्स के अनुसार पूरे टूर्नामेंट को अगले साल तक के लिए टाला जा सकता है।
बता दें कि आईपीएल के 12 साल के इतिहास में टूर्नामेंट को देश के बाहर आयोजित किया गया है लेकिन अब तक कभी भी इसे रद्द नहीं किया है, और इस बात को सरकार भी समझती है, शायद यही कारण है कि खेल मंत्रालय ने बीसीसीआई को खाली स्टेडियम में सावधनी बरतते हुए आयोजन करवाने का विकल्प दिया था।