ऑस्ट्रेलिया को उस समय शर्मसार होना पड़ा जब उसकी टीम के ओपनर ने वर्णान्ध (कलर ब्लाइंड) के कारण एक मैच से हटना पड़ गया।
कंगारू टीम के सलामी बल्लेबाज क्रिस रोगर्स ने शेफील्ड-शील्ड प्रतियोगिता में विक्टोरिया के लिए तस्मानिया के खिलाफ दिन-रात के मुकाबले में खेलने से मना कर दिया। इस मैच में प्रयोग के तौर गुलाबी गेंद का इस्तेमाल किया जाना है। यह मैच शनिवार को खेला जाना है।
लेकिन रोगर्स को वर्णान्ध है और उस कारण उन्हें गुलाबी गेंद को फांपने में दिक्कत होती है, इसलिए उन्होंने इस मैच से हटने का फैसला लिया था। वर्णान्ध के कारण उनके करियर को लेकर अटकलें भी लगाई जा रही थी।
हालांकि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) ने एक बयान जारी कर कहा कि वर्णान्ध क्रिकेटर क्रिस रोगर्स के गुलाबी गेंद से होने वाले मैच से हटने के फैसले से उनके करियर पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
सीए के टीम परफॉमेंस मैनेजर पैट हॉवर्ड ने कहा कि चयनकर्ताओं को किसी भी खिलाड़ी के एक मैच को लेकर फैसला नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि बाएं हाथ के बल्लेबाज के मैच से हटने से उनके टेस्ट क्रिकेट में खेलने में कोई बाधा नहीं आएगी।
उन्होंने कहा, "चार सदस्यीय चयन समिति की टीम सभी खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर लगातार नजर बनाए रखती है, खासकर दबाव के समय खिलाड़ियों की योग्यता पर नजर होती है।"
हालांकि 37 साल के रोगर्स का प्रदर्शन पिछले महीने पाकिस्तान के खिलाफ खत्म हुए टेस्ट सीरीज में बहुत बढ़िया नहीं रहा था। पिछले साल उन्होंने काउंटी क्रिकेट में मिडिलसेक्स के लिए लाजवाब प्रदर्शन किया था जो उनकी ऑस्ट्रेलियाई टीम में वापसी का कारण बना था।
सीए ने गुलाबी गेंद से क्रिकेट मैच कराने के अभियान में जोर-शोर से जुटा है और उसका लक्ष्य अगले साल न्यूजीलैंड के खिलाफ दिन-रात के टेस्ट मैच कराने का है।
रोगर्स ने कहा, "मुझे नई गेंद के साथ अभ्यास करने का ज्यादा मौका नहीं मिला है क्योंकि मैंने अभी बहुत मैच खेले हैं। 4 साल पहले मैंने दिन-रात का प्रथम श्रेणी मैच खेला था लेकिन अब यह मेरे लिए चुनौती बन चुकी है।"
ऑस्ट्रेलिया को अगला टेस्ट मैच भारत के साथ खेलना है। दोनों के बीच 5 दिसंबर को ब्रिसबेन में 4 मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मैच खेला जाएगा।