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चेतेश्वर पुजारा न चलते तो टीम इंडिया का ऑस्ट्रेलिया में क्या हाल होता?

Fri, 04 Jan 2019 06:11 AM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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वह पिछले साल अगस्त का महीना था, जब भारतीय टीम विराट कोहली की कप्तानी में इंग्लैंड पर दौरे पर थी। गर्म मौसम में इंग्लैंड का वह दौरा भारत के लिए मुश्किलों भरा था। पहले टेस्ट में टॉस के वक्त जब विराट कोहली ने प्लेइंग 11 की घोषणा की तो उसमें चेतेश्वर पुजारा का नाम नदारद था।

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बेशक, पुजारा उन दिनों खराब फॉर्म में चल रहे थे। वे काउंटी क्रिकेट में यॉर्कशायर की तरफ से ज्यादा रन नहीं बना सके थे। इसके अलावा अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र मैच में भी पुजारा का बल्ला खामोश ही रहा था।

पुजारा की जगह कोहली ने केएल राहुल को टीम में चुना था। राहुल आईपीएल में धमाकेदार बल्लेबाजी कर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर टेस्ट टीम में पहुंचे थे। दूसरी तरफ बेहद धीमी बल्लेबाजी करने वाले पुजारा टी-20 युग के दर्शकों के लिए किसी 'बोरिंग रन मशीन' सरीखे हो रहे थे।

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इंग्लैंड के खिलाफ पहले मैच में भले ही पुजारा को टीम से बाहर रखा गया था, फिर भी वे मैच में अपनी मौजूदगी दर्ज करवा रहे थे। दूसरे दिन के खेल से पहले वे सलामी बल्लेबाज मुरली विजय को काफी देर तक गेंद डालकर अभ्यास कराते रहे।
 



यह पुजारा के चरित्र को बताने वाला महज एक उदाहरण है। बर्मिंघम में राहुल फेल हुए तो क्रिकेट एक्सपर्ट से लेकर सोशल मीडिया पर क्रिकेट प्रशंसकों ने पुजारा को न खिलाने के भारतीय टीम प्रबंधन के फैसले की जमकर आलोचना की।

आखिरकार, लॉर्ड्स में पुजारा की टीम में वापसी हुई और उन्होंने बेहद जुझारू प्रदर्शन करते हुए सीरीज में एक शतक और अर्धशतक जमाया। हालांकि टेस्ट में नंबर वन टीम इंडिया को इंग्लैंड में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी।

ऑस्ट्रेलिया दौरे का दबाव

गर्मियों की बुरी यादों को पीछे छोड़ जब भारतीय टीम सर्द मौसम की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया के मैदान पर टेस्ट सीरीज खेलने उतरी तो इंग्लैड सीरीज का डर यहां भी कोहली के दिमाग पर हावी था।

टीम इंडिया की राहुल और मुरली विजय की सलामी जोड़ी लगातार फ़ेल हो रही थी ऐसे में भारत को एक ऐसे शख्स की जरूरत थी जो मैदान पर देर तक टिक सके। जो भारतीय पारी की एक धुरी बन सके और जो विरोधी गेंदबाजों के लंबे-लंबे स्पैल निकाल सके।

एडिलेड के पहले टेस्ट में ही पुजारा ने कोहली की यह तलाश खत्म कर दी। उन्होंने मैच की पहली पारी में 123 रनों की संघर्षपूर्ण पारी खेली। पुजारा की पारी इसलिए भी खास थी क्योंकि वे पारी के दूसरे ओवर में ही मैदान में उतर गए थे और कुल 246 गेंदों को सामना करते हुए वे भारत की ओर से आउट होने वाले नौवें खिलाड़ी थे।

पुजारा ने मैच की दूसरी पारी में भी सबसे ज्यादा 71 रन बनाए थे और टीम इंडिया को दौरे के पहले मैच में जीत दिलाई थी।

'दीवार' हैं पुजारा

टीम मैनेजमेंट और कप्तान पहले मैच के बाद ही पुजारा की अहमियत समझ चुके थे।

इससे पहले ऐसी खबरें अक्सर सुनने को मिलती रहती थी कि पुजारा पर तेज बल्लेबाजी करने का दबाव बनाया जा रहा है। एडिलेड टेस्ट में पुजारा ने दिखाया कि टेस्ट मैच में तेज बल्लेबाजी से ज्यादा अहम विकेट पर लंबे वक्त तक टिके रहना है।

दूसरे मैच में पुजारा दोनों पारियों में नहीं चल सके और मैच का नतीजा कंगारुओं के पक्ष में गया। इसके बाद मेलबर्न में एक बार फिर पुजारा का बल्ला बोला और उन्होंने कप्तान विराट कोहली के साथ मिलकर मैराथन साझेदारी निभाई।

दोनों बल्लेबाजों ने 170 रनों की पार्टनरशिप में 400 से अधिक गेंदें खेली। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को भारतीय पारी को एक बार आउट करने के लिए तीन नई गेंदें लेनी पड़ गई। पुजारा ने यहां भी 106 रन बनाए और गेंदें खेली 319। 

यानी तस्वीर साफ है कि अगर पुजारा का बल्ला खामोश हुआ तो टीम के बाकी साथी भी रन नहीं बना पाते।

गेंद का धागा उधेड़ने में माहिर

ऑस्ट्रेलियाई दौरे में भारत चार मैचों की सीरीज में इस समय 2-1 से आगे है। विपक्षी टीम के गेंदबाज जहां विराट और रहाणे जैसे बल्लेबाजों के लिए रणनीतियां बनाते रहे वहीं पुजारा चुपचाप एक छोर संभाले अपनी शानदार बल्लेबाजी से गेंद की चमक फीकी करने में लगे रहे।

रन बनाने के मामले में पुजारा इस सीरीज में सबसे ऊपर हैं। पुजारा ने सबसे ज्यादा 458 रन बनाए हैं। उनके पीछे भारतीय कप्तान विराट कोहली हैं जिनके नाम 282 रन हैं। यानी इस सीरीज में रन बनाने की रेस में पुजारा ने विराट कोहली को बहुत पीछे छोड़ दिया है।

मामला सिर्फ बनाने का ही नहीं है। पुजारा ने इस सीरीज में विकेट पर टिककर लंबे वक्त तक बल्लेबाजी भी की है। उन्होंने अभी तक 1135 गेंदें खेली हैं।

ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों से पुजारा की तुलना की जाए तो वे उनसे कोसों आगे नजर आते हैं। रन बनाने के मामले ऑस्ट्रेलिया की तरफ से ट्रेविस हेड ने सबसे ज्यादा 217 रन बनाए हैं जो कि पुजारा के मुकाबले आधे हैं।

इसी तरह गेंदे खेलने के मामले में उस्मान ख्वाजा ने 509 गेंदे खेली हैं, यहां भी वे पुजारा के सामने आधे ही नजर आते हैं।

स्पिन को खेलने में माहिर

ऑस्ट्रेलिया के लिए इस टेस्ट सीरीज में एक खिलाड़ी तुरुप का इक्का साबित हुआ है और वह है उनके ऑफ स्पिनर नाथन लियोन। पुजारा ने लियोन को भी बिना किसी मुश्किल के खेला है। इस टेस्ट सीरीज में पुजारा ने लियोन के खिलाफ 364 गेंदों का सामना किया और 164 रन बनाए।

जनवरी 2018 से अभी तक पुजारा स्पिनरों के खिलाफ 178 के औसत से 356 रन बना चुके हैं और सिर्फ दो बार वे स्पिनर के खिलाफ आउट हुए। स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ पिछले साल यह किसी भी बल्लेबाज का सबसे बेहतरीन रिकॉर्ड है।
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शतक दर शतक

मेलबर्न में जीत दर्ज करने के बाद विराट कोहली ने पुजारा की टीम अहमियत बताते हुए कहा था कि जिस तरह वे एक छोर पकड़ तक खड़े रहते हैं उससे दूसरे बल्लेबाजों को खुलकर खेलना आसान हो जाता है।

विराट ने कहा था, 'पुजारा के टीम में रहने का फायदा यह रहता है कि बाकी खिलाड़ी अपना नैचुरल गेम खेल पाते हैं। यही वजह है कि टीम इस सीरीज में कामयाब रही है। हमारी गेंदबाजी अच्छी है और वह 20 विकेट चटका सकती है।'

सिडनी टेस्ट की पहली पारी में पुजारा ने अपने करियर का 18वां शतक जड़ दिया। मौजूदा सीरीज में यह उनका तीसरा शतक है। आंकड़ों के लिहाज से वे ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ एक टेस्ट सीरीज में सबसे अधिक शतक लगाने वाले तीसरे भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं।

उनसे आगे कप्तान विराट कोहली हैं जिन्होंने साल 2014-15 के दौरे में 4 शतक लगाए थे, वहीं लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर ने 1977 में तीन शतक लगाए थे।

हालांकि सिडनी टेस्ट में पुजारा ने अपनी बल्लेबाजी में थोड़ी आक्रामकता भी शामिल की है। पहले दिन का खेल खत्म होने के बाद वे 130 रन पर नाबाद थे। इसके लिए उन्होंने 250 गेंदों पर 16 चौकों की भी मदद ली।
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