चेतन चौहान
उन्होंने गर्व के साथ कहा, 'यह संभवत: किस्मत थी लेकिन मैंने देखा है कि लोग शतक को लेकर मुझसे अधिक निराश हुए हैं। मुझे कोई मलाल नहीं है। मैंने भारत के लिए 40 टेस्ट खेले और सुनील गावस्कर का सलामी जोड़दार रहा।' बैकफुट के मजबूत खिलाड़ी चौहान बाउंसर का अच्छी तरह सामना करते थे। उनके करियर का सबसे शानदार चरण 1977 से 1981 के बीच रहा जब वह शीर्ष क्रम में गावस्कर के साथ लगातार खेलते थे।