आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के अंतिम संस्करण के आखिरी पड़ाव तक पहुंच चुकी टीम इंडिया जीत से मात्र एक कदम की दूरी पर है।
दूसरे सेमीफाइनल में जब कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की सेना मैदान पर बृहस्पतिवार को श्रीलंका के सामने उतरेगी तो उसका लक्ष्य हर हाल में विपक्षी टीम को फतह करना होगा।
यह दिलचस्प है कि वर्ष 2002-03 में भारत और श्रीलंका दोनों ही संयुक्त रूप से आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में विजेता रही थी। लेकिन टीम इंडिया को कार्डिफ में हर हाल में श्रीलंकाई चीतों का शिकार करना होगा ताकि वह आखिरी बार इस ट्रॉफी को हासिल करने का इतिहास बना सके।
हालांकि आईसीसी विश्वकप में भारत के हाथों ही फाइनल हार चुकी श्रीलंकाई टीम भी इस मिनी वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को पछाड़ अपनी हार का बदला लेने उतरेगी। श्रीलंका के अधिकतर खिलाड़ी चैंपियंस ट्रॉफी से पहले आईपीएल में टीम इंडिया के ही कई खिलाड़ियों के साथ खेल चुके हैं।
इस लिहाज से दोनों ही टीमें एक दूसरे की कमजोरियों और ताकत से भी अच्छी तरह वाकिफ हैं। भारत का टूर्नामेंट में अभी तक बेहतरीन प्रदर्शन रहा है और उसने अपने अभ्यास मैचों सहित मुख्य टूर्नामेंट के तीनों मैच जीते हैं। भारत ने द. अफ्रीका को पहले मैच में 26 रन, दूसरे मैच में वेस्टइंडीज को आठ विकेट से तथा तीसरे मैच में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को आठ विकेट से हराया था।
बल्लेबाजी दीवार को तोड़ना मुश्किल
टीम इंडिया इस समय आल राउंड प्रदर्शन कर रही है और बल्लेबाजी, गेंदबाजी तथा क्षेत्ररक्षण में भी उसने खुद को साबित किया है। बल्लेबाज शिखर धवन और रोहित शर्मा का ओपनिंग में लगातार धमाकेदार प्रदर्शन जारी है। धवन ने पाकिस्तान के साथ आखिरी ग्रुप मैच में 48 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली थी जबकि द. अफ्रीका के खिलाफ 114 और वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 102 रन बनाए थे।
इसके अलावा मुश्किल घड़ी में कप्तान धोनी खेवन हार की भूमिका निभाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। बल्लेबाजी क्रम में युवा बल्लेबाज विराट कोहली, दिनेश कार्तिक, आलराउंडर रवींद्र जडेजा और सुरेश रैना किसी भी परिस्थिति में टीम को संभाल सकते हैं।
गेंदबाजी आक्रमण कर रहा है कमाल
टीम को विजयी पथ पर चलाने में बल्लेबाजों की ही तरह गेंदबाजों की भी अहम भूमिका है। पाकिस्तान के खिलाफ आखिरी मैच में मात्र 19 रन पर दो विकेट लेकर भुवनेश्वर कुमार मैन आफ द मैच रहे थे जबकि इशांत शर्मा, ऑलराउंडर जडेजा, रविचंद्रन अश्विन और उमेश यादव ने भी पिछले सभी मैचों में घातक गेंदबाजी से विपक्षी टीम के बल्लेबाजों के सामने कड़ी चुनौती पेश की है।
चैंपियंस ट्रॉफी में धोनी पांच विशेषज्ञ गेंदबाजों को खिलाने की रणनीति के साथ उतरे हैं जिसकी घोषणा उन्होंने टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही कर दी थी। ऐसे में गेंदबाजों ने भी खुद को बखूबी साबित किया है और श्रीलंकाई बल्लेबाजों के लिए वे कितनी बड़ी चुनौती होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
श्रीलंकाई खड़ी कर सकते हैं मुश्किल
हालांकि श्रीलंकाई टीम ने टूर्नामेंट में संतोषजनक प्रदर्शन जरूर किया है लेकिन पलटवार करने में श्रीलंकाई माहिर हैं। श्रीलंका को न्यूजीलैंड से अपना पहला ग्रुप मैच मात्र एक विकेट से गंवाना पड़ था लेकिन उसके बाद टीम ने मैच में वापसी करते हुए इंग्लैंड को अगले मैच में सात विकेट तथा आस्ट्रेलिया को 20 रन से हराया था।
आस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी मैच में माहेला जयवर्धने ने नाबाद 84 रन की मैच आफ द मैच पारी खेल टीम को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में मदद की थी। इसके अलावा कुशाल परेरा, तिलकरत्ने दिलशान, कुमार संगकारा, लाहिरू थिरिमाने और कप्तान एंजेलो मैथ्यूज के रूप में टीम के पास मजबूत बल्लेबाजी क्रम और नुवान कुलशेखरा, शमिंडा इरंगा, लसित मलिंगा और रंगना हेरात के रूप में बेहतरीन गेंदबाजी क्रम है जो टीम इंडिया के सामने कड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं।
बारिश बन सकती है बाधा
बृहस्पतिवार को भी बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में अनुकूल हालात में तेज गेंदबाजों को शुरुआती मदद मिलने की उम्मीद है। सोफिया गार्डंस के मुख्य कोच कीथ एक्स्टन का मानना है कि इस पिच पर 280 एक अच्छा स्कोर है, लेकिन जीतने के लिए 300 का आंकड़ा पार करना बेहतर होगा।