मजबूती: बल्लेबाजी और स्पिन गेंदबाजी के दम पर भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका और पाकिस्तान के साथ चैंपियंस ट्रॉफी में प्रबल दावेदारों में से एक होगी। चैंपियंस ट्रॉफी से पहले भारत ने अपनी मेजबानी में इंग्लैंड को 3-0 से हराकर अपनी तैयारियों के संकेत दे दिए हैं। कप्तान रोहित शर्मा ने भी शतक लगाकर फॉर्म में वापसी के संकेत दिए हैं। विराट भी पुराने टच में दिखने लगे हैं। युवा बल्लेबाज शुभमन गिल बेहतरीन लय में हैं और मध्यक्रम को श्रेयस अय्यर मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
गेंदबाजी में भारत का स्पिन विभाग रवींद्र जडेजा, कुलदीप, अक्षर और वरुण की मौजूदगी से मजबूत नजर आता है। भारत के ग्रुप में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के अलावा बांग्लादेश और न्यूजीलैंड हैं। भारत दो बार ट्रॉफी जीत चुका है, पिछली बार चैंपियंस ट्रॉफी 2013 में इंग्लैंड में जीती थी जबकि 2002 में श्रीलंका के साथ संयुक्त विजेता था। पिछली दो बार से फाइनल में पहुंच रही भारतीय टीम का जीत प्रतिशत 69.2 है। उसने अब तक 29 में से 18 मैच जीते हैं।
कमजोरी: तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति निश्चित रूप से भारत को बड़ा नुकसान पहुंचाएगी। बुमराह हाल के दिनों में तीनों फॉर्मेंट्स में भारत के सबसे बड़े मैच विजेता के रूप में उभरे हैं। वह लगभग हर बार जब गेंदबाजी करते हैं तो एक विकेट की गारंटी देते हैं। बुमराह के नहीं होने से मोहम्मद शमी टीम के सबसे अनुभवी तेज गेंदबाज होंगे। शमी ने खुद चोट के कारण लंबे समय तक बाहर रहने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की है। इसलिए उनके फॉर्म को लेकर हमेशा अनिश्चितता बनी रहेगी।
अवसर: वरुण चक्रवर्ती को भारतीय टीम में शामिल किया गया है। मिस्ट्री स्पिनर ने इंग्लैंड के खिलाफ एक शानदार टी20 सीरीज खेली थी। यह टूर्नामेंट उनके लिए भारत की वनडे टीम में जगह बनाने का मौका हो सकता है।
खतरा: पिछले साल आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल को छोड़कर भारत हाल के वर्षों में आईसीसी टूर्नामेंट के फाइनल में ही लड़खड़ा गया है। भारत को इतिहास से सावधान रहना चाहिए बशर्ते वे इस बार फाइनल के लिए क्वालिफाई करें।