छत्तीसगढ़ के कप्तान हरप्रीत सिंह भाटिया उन घरेलू क्रिकेटरों को शामिल रहे जिन्हें महामारी के बीच ब्रिटेन में क्लब क्रिकेट खेलने का मौका मिला। वह 2017 से बार्न्सले वूली माइनर्स की ओर से खेल रहे हैं। भाटिया ने कहा, 'पिछले सत्र में मैं सीमित ओवरों के सभी 10 मैच खेला। स्पष्ट तौर पर यह पर्याप्त नहीं था। मुझे अतिरिक्त पैसे के लिए ब्रिटेन आना पड़ा। भारत में मेरे पास नौकरी नहीं है इसलिए अपनी कमाई में इजाफे के लिए मुझे इंग्लैंड आना पड़ता है।'
उन्होंने कहा, 'अगर स्वदेश में मेरे पास केंद्रीय अनुबंध होता तो मेरा खेलने के लिए ब्रिटेन आना अनिवार्य नहीं होता। बीसीसीआई ने अतीत में सहयोग किया है और मुझे उम्मीद है कि इस मुश्किल समय में भी वे अच्छे मुआवजे के साथ हमारी मदद करेंगे और उम्मीद करते हैं कि राज्य संघों से अनुबंध मिलेंगे।' सितंबर तक ब्रिटेन में रहने वाले भाटिया ने कहा, 'हमें यह ध्यान में रखते हुए नीति बनानी होगी कि अधिकांश खिलाड़ी आईपीएल नहीं खेलते और उनके पास नौकरियां भी नहीं हैं। और तब क्या होगा अगर मैं चोटिल हो जाऊं और पूरे सत्र में नहीं खेल पाऊं। यहीं पर अनुबंध और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।'
इस सत्र में कोलकाता नाइट राइडर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले घरेलू क्रिकेट के एक अन्य अनुभवी खिलाड़ी शेल्डन जैकसन का मानना है कि महिला क्रिकेटरों को भी अनुबंध दिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा, 'राज्य संघों को अनुबंध देने चाहिए। इससे वे दर्शा सकते हैं कि वे अपने क्रिकेटरों की देखभाल करते हैं विशेषकर इस तरह के समय में। आपको नहीं पता कि कोविड महामारी कब तक चलेगी।'
जैकसन ने कहा, 'कम से कम खिलाड़ियों के पास सुरक्षा तो होगी कि वह ऐसे समय में अपने परिवारों का ख्याल रख सकते हैं और अपने जरूरी भुगतान कर सकते हैं। और सिर्फ पुरुष क्रिकेटर ही क्यों। महिला क्रिकेटरों को भी अनुबंध मिलने चाहिए।' बीसीसीआई कोषाध्यक्ष अरूण धूमल पहले ही कह चुके हैं कि बोर्ड राज्य संघों के साथ मिलाकर मुआवजे के पैकेज पर काम कर रहा है। हालांकि इस मुद्दे पर 29 मई को हुई आम सभा की विशेष बैठक में चर्चा नहीं हुई। भारत का घरेलू सत्र अस्थाई रूप से सितंबर में शुरू होना है लेकिन यह देश में कोविड की स्थिति पर निर्भर करेगा।