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जेटली पर विवाद: बिशन सिंह बेदी ने DDCA से दिया इस्तीफा, स्टैंड से अपना नाम हटाने के लिए भी कहा

Wed, 23 Dec 2020 01:06 PM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बिशन सिंह बेदी - फोटो : getty
दिल्ली के प्रसिद्ध फिरोजशाह कोटला मैदान पर डीडीसीए के दिवंगत अध्यक्ष अरूण जेटली की प्रतिमा लगाने के फैसले पर विवाद छिड़ गया है। इससे खफा होकर महान स्पिनर बिशन सिंह बेदी ने क्रिकेट संघ से उनका नाम दर्शक दीर्घा से हटाने के लिए कहा है। दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) पर बरसते हुए बेदी ने भाई भतीजावाद और ‘क्रिकेटरों से ऊपर प्रशासकों को रखने’ का आरोप लगाते हुए संघ की सदस्यता भी छोड़ दी।
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बिशन सिंह बेदी - फोटो : getty
उन्होंने डीडीसीए के मौजूदा अध्यक्ष और अरूण जेटली के बेटे रोहन जेटली को लिखे पत्र में कहा, ‘मैं काफी सहनशील इंसान हूं लेकिन अब मेरे सब्र का बांध टूट रहा है। डीडीसीए ने मेरे सब्र की परीक्षा ली है और मुझे यह कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर किया।’

बेदी ने कहा, ‘तो अध्यक्ष महोदय मैं आपसे मेरा नाम उस स्टैंड से हटाने का अनुरोध कर रहा हूं जो मेरे नाम पर है और यह तुरंत प्रभाव से किया जाए। मैं डीडीसीए की सदस्यता भी छोड़ रहा हूं।’
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अरुण जेटली को समर्पित स्टेडियम के लिए कवायद शुरू - फोटो : सोशल मीडिया
गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री जेटली 1999 से 2013 के बीच 14 साल तक डीडीसीए अध्यक्ष रहे। उनके निधन के बाद फिरोज शाह कोटला स्टेडियम का नाम अरुण जेटली स्टेडियम कर दिया गया। अब क्रिकेट संघ उनकी याद में कोटला पर उनकी छह फीट की प्रतिमा लगाने की सोच रहा है। डीडीसीए ने 2017 में मोहिंदर अमरनाथ और बेदी के नाम पर स्टैंड्स का नामकरण किया था।

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अरुण जेटली - फोटो : PTI
बेदी ने कहा, ‘मैंने काफी सोच समझकर यह फैसला लिया है। मैं सम्मान का अपमान करने वालों में से नहीं हूं। लेकिन हमें पता है कि सम्मान के साथ जिम्मेदारी भी आती है। मैं यह सुनिश्चित करने के लिए सम्मान वापस कर रहा हूं कि जिन मूल्यों के साथ मैंने क्रिकेट खेला है, वे मेरे संन्यास लेने के चार दशक बाद भी जस के तस हैं।’ उन्होंने कहा कि वह कभी जेटली की कार्यशैली के मुरीद नहीं रहे और हमेशा उन फैसलों का विरोध किया जो उन्हें सही नहीं लगे।

उन्होंने कहा, ‘डीडीसीए का कामकाज चलाने के लिए जिस तरह से वह लोगों को चुनते थे, उसे लेकर मेरा ऐतराज सभी को पता है। मैं एक बार उनके घर पर हुई एक बैठक से बाहर निकल आया था क्योंकि वह बदतमीजी कर रहे एक शख्स को बाहर का रास्ता नहीं दिखा सके थे।’
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bishan singh bedi
बेदी ने कहा, ‘मैं इस मामले में बहुत सख्त हूं। शायद काफी पुराने ख्याल का। लेकिन मैं भारतीय क्रिकेटर होने पर इतना फख्र रखता हूं कि चापलूसों से भरे अरूण जेटली के दरबार में हाजिरी लगाना जरूरी नहीं समझता था।’ उन्होंने कहा, ‘फिरोजशाह कोटला मैदान का नाम आनन फानन में दिवंगत अरूण जेटली के नाम पर रख दिया गया जो गलत था लेकिन मुझे लगा कि कभी तो सदबुद्धि आएगी। लेकिन मैं गलत था। अब मैंने सुना कि कोटला पर अरूण जेटली की मूर्ति लगा रहे हैं। मैं इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता।’ उन्होंने कहा कि दिवंगत जेटली मूल रूप से नेता थे और संसद को उनकी यादों को संजोना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘नाकामी का जश्न स्मृति चिन्हों और पुतलों से नहीं मनाते। उन्हें भूल जाना होता है।’
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दिल्ली जिला क्रिकेट संघ - फोटो : ट्विटर
बेदी ने कहा, ‘आपके आसपास घिरे लोग आपको नहीं बताएंगे कि लॉर्ड्स पर डब्ल्यू जी ग्रेस, ओवल पर सर जैक हॉब्स, सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर सर डॉन ब्रैडमेन, बारबाडोस में सर गैरी सोबर्स और मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर शेन वार्न की प्रतिमाएं लगी हैं।’
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बिशन सिंह बेदी - फोटो : india today
उन्होंने कहा, ‘खेल के मैदान पर खेलों से जुड़े रोल मॉडल रहने चाहिए। प्रशासकों की जगह शीशे के उनके कैबिन में ही है। डीडीसीए यह वैश्विक संस्कृति को नहीं समझता तो मैं इससे परे रहना ही ठीक समझता हूं। मैं ऐसे स्टेडियम का हिस्सा नहीं रहना चाहता जिसकी प्राथमिकताएं ही गलत हों। जहां प्रशासकों को क्रिकेटरों से ऊपर रखा जाता हो। कृपया मेरा नाम तुरंत प्रभाव से हटा दें।'
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