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CWG 2018: जूरी के फैसले से वेटलिफ्टिंग में भारत को बड़ा नुकसान, हाथ से फिसले दो गोल्ड मेडल

Mon, 09 Apr 2018 11:33 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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pradeep kumar
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एक ओर अनुभवहीनता और दूसरी ओर जूरी के कड़े फैसले के चलते कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के हाथ में आए दो गोल्ड मेडल फिसल गए। 105 किलोभार वर्ग में प्रदीप कुमार की दूसरी क्लीन एंड जर्क लिफ्ट को जजों ने पास करार दिया, लेकिन जूरी ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग कर उनकी इस लिफ्ट को नकार दिया। यह बेहद दुर्लभ है जब जजों के फैसले को जूरी पलट दे। खास बात यह है कि कॉमनवेल्थ खेलों के इतिहास में पहली बार भारतीय लिफ्टर के खिलाफ इस तरह का फैसला आया है।

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वहीं 18 वर्षीय शूटर मेहुली ने 10 मीटर एयर राइफल के फाइनल में 24वां और अंतिम निशाना परफेक्ट 10.9 पर लगाया तो वह समझ बैठीं की उन्होंने गोल्ड जीत लिया है। उन्होंने अपना ब्लाइंडर उतार दिया और खुशी में हाथ लहराते हुए राइफल तक पैक करने लगीं। टेक्निकल कमेटी ने उन्हें बताया कि उनका सिंगापुर की मार्टिना वेलेसो से स्कोर बराबर हुआ है और मुकाबला सिंगल शूट ऑफ में जाएगा। 

वेलेसो जहां कंधे पर राइफल साधे सीधे खड़ी रहीं वहीं मेहुली को दोबारा राइफल उठानी पड़ी और ब्लाइंडर लगाना पड़ा। शूटिंग के समय शूटर कभी भी अपनी गन उतार कर नहीं रखता है, इससे उसकी गन पर लगी साइट खराब हो जाती है जिससे निशाना भटकने के अवसर रहते हैं।

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मेहूली घोष और अर्पूवी चंदेला
मेहुली के पास समय भी कम बचा था जब तक वह निशाने के लिए तैयार होतीं तब तक वेलेसो 10.3 पर निशाना लगा चुकी थीं और मेहुली 10.9 का स्कोर करने के बाद 9.9 पर ही निशाना लगा सकीं। कॉमनवेल्थ गेम्स में कई बार की गोल्ड मेडलिस्ट अंजलि भागवत ने इसे मेहुली की अनुभवहीनता बताया। 

वहीं कई ओलंपिक और खेलों में भारत के कोच रहे द्रोणाचार्य अवार्डी पाल सिंह संधू जूरी के फैसले से हैरान हैं। संधू का कहना है कि इन खेलों में भारतीय लिफ्टर के साथ ऐसा कभी नहीं हुआ। जजों के लिफ्ट पास करने के बाद अगर जूरी को संदेह होता है तो इसका लाभ लिफ्टर के खाते में जाता है, लेकिन प्रदीप को यह लाभ नहीं दिया गया।

खास बात यह है कि वेटलिफ्टिंग फेडरेशन के सेक्रेटरी जनरल सहदेव यादव इन खेलों में जूरी सदस्य हैं, लेकिन प्रदीप के भार वर्ग में उनकी ड्यूटी नहीं थी। सहदेव के उस वक्त जूरी में होने पर जजों का फैसला नहीं पलटा जाता। सहदेव का कहना है कि यह दुर्भाग्य था हाथ में आया छठा गोल्ड मेडल निकल गया, लेकिन जूरी के फैसले पर प्रोटेस्ट भी दर्ज नहीं किया जा सकता है। बावजूद इसके भारत ने अपने प्रदर्शन से टीम चैंपियनशिप का खिताब जीता।
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