मेहूली घोष और अर्पूवी चंदेला
मेहुली के पास समय भी कम बचा था जब तक वह निशाने के लिए तैयार होतीं तब तक वेलेसो 10.3 पर निशाना लगा चुकी थीं और मेहुली 10.9 का स्कोर करने के बाद 9.9 पर ही निशाना लगा सकीं। कॉमनवेल्थ गेम्स में कई बार की गोल्ड मेडलिस्ट अंजलि भागवत ने इसे मेहुली की अनुभवहीनता बताया।
वहीं कई
ओलंपिक और खेलों में भारत के कोच रहे द्रोणाचार्य अवार्डी पाल सिंह संधू जूरी के फैसले से हैरान हैं। संधू का कहना है कि इन खेलों में भारतीय लिफ्टर के साथ ऐसा कभी नहीं हुआ। जजों के लिफ्ट पास करने के बाद अगर जूरी को संदेह होता है तो इसका लाभ लिफ्टर के खाते में जाता है, लेकिन प्रदीप को यह लाभ नहीं दिया गया।
खास बात यह है कि वेटलिफ्टिंग फेडरेशन के सेक्रेटरी जनरल सहदेव यादव इन खेलों में जूरी सदस्य हैं, लेकिन प्रदीप के भार वर्ग में उनकी ड्यूटी नहीं थी। सहदेव के उस वक्त जूरी में होने पर जजों का फैसला नहीं पलटा जाता। सहदेव का कहना है कि यह दुर्भाग्य था हाथ में आया छठा गोल्ड मेडल निकल गया, लेकिन जूरी के फैसले पर प्रोटेस्ट भी दर्ज नहीं किया जा सकता है। बावजूद इसके भारत ने अपने प्रदर्शन से टीम चैंपियनशिप का खिताब जीता।