टीम इंडिया की नई सनसनी भुवनेश्वर कुमार ने फाइनल में भी अपना जलवा बरकरार रखा। और न सिर्फ श्रीलंका को शुरुआती झटके दिए बल्कि उनकी लय बिगाड़ कर रख दी।
भुवनेश्वर ने अपनी ख्याति के अनुरूप फाइनल मैच में भी श्रीलंका की सलामी जोड़ी को तोड़ दिया। श्रीलंका एक समय 27 रन पर बिना किसी नुकसान के आगे बढ़ रहा था लेकिन भुवी ने ओपनर उपल थरंगा को विकेटकीपर धोनी के हाथों कैच आउट करा दिया।
बाएं हाथ के बल्लेबाज को निशाना बनाने के बाद उन्होंने महेला जयवर्धने को भी पवेलियन की राह दिखा दी।
हालांकि भुवी के दोहरे झटके के बाद कुमार संगकारा (71) और लाहिरू थिरिमने (46) ने तीसरे विकेट के लिए 122 रनों की शतकीय साझेदारी कर श्रीलंका को संकट से बाहर निकाल दिया।
लेकिन श्रीलंकाई बल्लेबाजों को संकट से बाहर निकलने में लंबा समय लग गया और वे बड़ा स्कोर बनाने में नाकाम रहे। अंतिम ओवरों में रवींद्र जडेजा ने चार विकेट झटककर श्रीलंकाई टीम को 50 ओवर से पहले ही समेट दिया।
स्विंग गेंदबाजी में माहिर भुवी ने खिताबी जंग में न सिर्फ दो विकेट झटके बल्कि आठ ओवर में चार मेडन में फेंके और महज 24 रन ही दिए।
भुवी ने फाइनल मैच से पहले भी शानदार प्रदर्शन किया है। इससे पहले अंतिम लीग मैच में भी उन्होंने अपने वनडे कैरियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए टीम को जीत दिलाई थी।
उन्होंने चार मैचों में सात मेडन फेंकते हुए कुल 10 विकेट हासिल किए। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें मैन ऑफ द सीरीज पुरस्कार ने नवाजा गया। हालांकि श्रीलंका के रंगना हेराथ ने भी चार मैचों से 10 विकेट झटके लेकिन वे भारतीय गेंदबाज से औसत के मामले में पिछड़ गए।
महज 17 वनडे मैच खेलने वाले भुवनेश्वर कुमार पहली बार मैन ऑफ द सीरीज बने हैं।